हवन करता जेष्ठ

01-06-2020

हवन करता जेष्ठ

रामदयाल रोहज

बनी तपोभूमि वसुधा
है मरुथल कुंड हवन
पूर्ण विधि विधानों से
करता है जेष्ठ हवन


मंत्रों से अग्नि प्रज्वलित
लू - लपटें उठीं गगन
आहुति देता बार बार
समिधा जीवों के तन


निर्जल उपवास किया धारण
सम्मिलित है मरु कानन
कमज़ोर देह, मूँदे लोचन
हैं सूख रहे आनन


बिना किसी व्यवधान के
जब हुआ हवन सम्पन्न
ख़ुशबू जा पहुँची स्वर्ग में
बैठे चिंतित सुर गण


चढ़कर इन्द्र घन यान में
आ पहुँच गया मरु वन
तपसी जन  पर प्रसन्न होकर
बरसाए मेघ सुमन

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