सुनील कुमार मिश्रा ‘मासूम’ - मुक्तक (व्यंग्य) - 001

15-12-2025

सुनील कुमार मिश्रा ‘मासूम’ - मुक्तक (व्यंग्य) - 001

सुनील कुमार मिश्रा ‘मासूम’ (अंक: 290, दिसंबर द्वितीय, 2025 में प्रकाशित)

 

1. 
दरिया पार जाना सभी ने चाहा, पर तैरा कोई कोई 
दमकना सभी ने चाहा पर चमका कोई कोई 
बिन दुःख के सुख सम्भव नहीं-
क्या गुलाब बनेंगे जो लोग हैं छुई-मुई?॥
 
2.
छपास की बीमारी एक समस्या भारी है 
चाह नहीं पूरी तो पड़ती कसर भारी है, 
चमकना और दमकना का अंतर नहीं मालूम—
मुझे तो सिर्फ़ छपने हेतु करनी तीमारदारी है॥

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें