कौन कहता है हवा दीपक बुझाना चाहती है
अश्विनी कुमार त्रिपाठी2122 2122 2122 2122
कौन कहता है हवा दीपक बुझाना चाहती है
वह दीये के हौसले को आज़माना चाहती है
अनसुनी करना नहीं बेटी की उस आवाज़ को तुम
जो तुम्हें ख़ामोश रहकर कुछ बताना चाहती है
सोचते हो क्यूँ नदी पर्वत से दौड़ी आ रही है
वह नदी के राज़ सागर में छिपाना चाहती है
जातिसूचक हो रहे हैं इंद्रधनुषी रंग सारे
लग रहा है कोई आफ़त सर उठाना चाहती है
नोचकर नन्ही कली को अब मसलना छोड़ भी दो
वह कली भी फूल बनकर मुस्कुराना चाहती है