बलिदान

मुनीष भाटिया (अंक: 294, अप्रैल प्रथम, 2026 में प्रकाशित)


(शहीद दिवस 23 मार्च विशेष)
 
मातृभूमि पर मिटने वालों को, शत-शत मेरा प्रणाम, 
भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू तुमसे रोशन हिंदुस्तान। 
 
केसरी चोला ओढ़ के तुमने, मौत को गले लगाया था, 
हँसते-हँसते फाँसी चढ़कर, आज़ादी का दीप जलाया था। 
  
ना डर था तुमको सूली का, ना भय अत्याचारों का, 
हर धड़कन में गूँज रहा था, नारा इंक़िलाब का। 
 
माँ भारती की ख़ातिर, ख़ुद को तुमने क़ुर्बान किया, 
अपनी हर एक साँस को तुमने, भारत के नाम किया। 
 
जब-जब दुश्मन आँख उठाए, याद तुम्हारी आती है, 
हर नौजवान के सीने में, ज्वाला बनकर जल जाती है। 
 
तुमसे सीखा जीना और तुमसे सीखा मर जाना, 
देश की ख़ातिर हँसते-हँसते, हर दर्द को सह जाना। 

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