प्रणय-निवेदन

डॉ. कविता भट्ट

जिस उम्मीद से 
किसान देखता है 
आकाश की ओर 
उसी उम्मीद-सा है, प्रिय!
तुम्हारा प्रणय-निवेदन। 

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