फागुनी हाइकु

03-05-2012

फागुनी हाइकु

मानोशी चैटर्जी

बिछा पलाश
फागुन बिखेरता
रंग गोधूली


खेले सरसों
वसंती हवा संग
धरा लाजाये


धूप थिरके
पीली चूनर ओढ़
अंग सजाये


बरसा प्रेम
होरी के रंग संग
भेद मिटाये

पी संग खेले
गोरी जी भर होरी
लाज भुलाये

डारा पिया ने
ऐसा रंग प्रेम का
छूटे न अंग


ए री कोयल
अब मत पुकार
निठुर पी को

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