किसी दिन तो

01-12-2019

किसी दिन तो

डॉ. कविता भट्ट

किसी दिन तो 
फूटता तुम्हारा प्रेम 
पहाड़ से छल-छल 
बहते झरने-सा 
अभिसिंचित होता तन-मन 
अतृप्त धरा-सा।

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