उसने 
अपने पर्स से 
निकाल दी है,
मेरी तस्वीर
और 
रसोई-घर में 
लगा दिये हैं
ताले!

जिस दिन से,
मैंने उसे कहा है -
"मत किया करो, 
इतना शृंगार,
कि देखकर तुम्हारी
खूबसूरती, 
'किचन' में 
जलने लगें रोटियाँ!"

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