शुक्रिया

15-10-2019

शुक्रिया

डॉ. महेश आलोक

मैं साँसों में उड़ती चिड़िया को शुक्रिया कहना चाहूँगा
कि आकाश को टूटकर गिरने से बचाये हुए है अब भी
जबकि चिड़िया को अन्तरिक्ष के ऊपर मुक्त होकर उड़ना चाहिये
सूरज के लाल फल को चखने के लिये


मैं साँसों की नदी में तैरते दीपक को शुक्रिया कहना चाहूँगा
कि वह चन्द्रमा को चुनौती दे रहा है लगातार अपनी टिमटिमाती लौ से
चन्द्रमा के भीतर फैले अँधेरे की आँखों के उजाले को टूटकर
मरने से बचाने के लिये


मैं साँसों की सड़क पर पैदल चलते दुखों को शुक्रिया कहना चाहूँगा
कि पैरों में पड़े छालों से ख़ून रिसने के बावजूद नहीं छोड़ा उन्होंने
खरगोश की तरह उछलते सुखों को रास्ता देने का पुराना रिवाज़
मेरे अन्दर की गुलाबों वाली ख़ुशबू से
रास्ते के हाथों को मलने के लिये


मैं साँसों की हवा का हाथ थामे उस सिन्दूर को शुक्रिया कहना चाहूँगा
कि उसकी अनश्वर रोशनी से घर के कोने अँतरे में फँसे विषैले कीड़े
दिखाई देते हैं हमेशा
सचेत होना भी कम बड़ी बात नहीं है विषैले कीड़ों के
संक्रमण से बचने के लिये


मैं साँसों के नथुनों से निकलती साँसों को शुक्रिया कहना चाहूँगा
कि उन्होंने मुझे जीवित रखा है
शुक्रिया कहने के लिये

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