राष्ट्रीय पक्षी दिवस आज है,
पाँच जनवरी पावन बेला।
प्रकृति ने सौंपा हमें धरोहर,
पक्षियों का रंगीन मेला।
रंग-बिरंगी ऊँची उड़ानें,
सपनों को देतीं विस्तार।
मन को भाए रूप-सौंदर्य,
जीवन का सुंदर उपहार।
कमेडी, मोर, कबूतर, टीटोडी,
चहचह से घर-आँगन भरते।
कोयल, कौआ, चील, गिद्ध,
अब गिनती में कम होते दिखते।
सोन चिरैया, कटफोड़वा,
तोता-मैना, मीठी वाणी।
नीलकंठ हर्ष जगा जाए,
क़ुदरत की अमर कहानी।
आसमान में पंछी मंडराएँ,
जैव-विविधता शान हमारी।
कटते वन, सूखते सरोवर,
हम सबकी बढ़ती ज़िम्मेदारी।
दाना-पानी, पक्षी-प्याऊ, परिंडा,
करुणा का हो यह व्यवहार।
पक्षी बचेंगे, सृष्टि बचेगी,
यही मानव का सच्चा संस्कार।