पक्षी

खान मनजीत भावड़िया 'मजीद’ (अंक: 292, जनवरी द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

राष्ट्रीय पक्षी दिवस आज है, 
पाँच जनवरी पावन बेला। 
प्रकृति ने सौंपा हमें धरोहर, 
पक्षियों का रंगीन मेला। 
 
रंग-बिरंगी ऊँची उड़ानें, 
सपनों को देतीं विस्तार। 
मन को भाए रूप-सौंदर्य, 
जीवन का सुंदर उपहार। 
 
कमेडी, मोर, कबूतर, टीटोडी, 
चहचह से घर-आँगन भरते। 
कोयल, कौआ, चील, गिद्ध, 
अब गिनती में कम होते दिखते। 
 
सोन चिरैया, कटफोड़वा, 
तोता-मैना, मीठी वाणी। 
नीलकंठ हर्ष जगा जाए, 
क़ुदरत की अमर कहानी। 
 
आसमान में पंछी मंडराएँ, 
जैव-विविधता शान हमारी। 
कटते वन, सूखते सरोवर, 
हम सबकी बढ़ती ज़िम्मेदारी। 
 
दाना-पानी, पक्षी-प्याऊ, परिंडा, 
करुणा का हो यह व्यवहार। 
पक्षी बचेंगे, सृष्टि बचेगी, 
यही मानव का सच्चा संस्कार।

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