रास्ता बुलाता है, राहगीरों को 
कोई सुनता तो कोई अनसुना कर देता 
रास्ता तो ख़ुद स्थिर रह कर 
मंज़िल तक पहुँचाता पथिक को 
कुछ चलते आधे फ़ासले तो 
कुछ फ़तह कर लेते मंज़िल को 
रास्ता तो रहता एक-सा 
पर अलग-अलग लगता सबको 
कोई कहता कठिन तो कोई सरल 
सुनकर सबकी विचारधाराओं को 
निर्णय न करना रास्ते की कठिनाइयों का 
जुनून हौसलों से फ़तह करना है अब मंज़िल को। 

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