छतों पर शाम बिताना

15-09-2021

छतों पर शाम बिताना

वैदेही कुमारी

छतों पर जो शामें बीतीं 
कहानी कहतीं मेरे इश्क़ की 
होता एक कोने पर मैं 
दूसरे कोने पर तू जो होती 
मिलती निगाहें 
आँखों से बातें भी हैं होतीं 
चिड़ियों की चहचहाट 
कानों में रस घोलती 
तेरा यूँ मुस्कुराना 
आखें झुका शर्माना 
मुहब्बत का इज़हार तो करती 
थी जो अधूरी 
पूरा करने की तमन्ना तो रहती 
इशारों इशारों में तुझसे तेरे दिल का पता पूछती 
है कोई तेरे मन में 
ऐसी शंका भी तो होती 
गुज़रती शाम छतों पे नाम तेरे होती 
तेरे मेरे प्रेम की कहानी है कहती। 

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