बालमन के चितेरे कवि शिव मोहन यादव

01-08-2021

बालमन के चितेरे कवि शिव मोहन यादव

डॉ. उमेश चन्द्र सिरसवारी

 

पुस्तक का नाम : सिंहों के अवतार तुम्हीं हो
कवि का नाम : शिव मोहन यादव
प्रकाशक : लोकोदय प्रकाशन, लखनऊ
संस्करण : 2020
मूल्य : 125/-

बाल साहित्य से तात्पर्य बच्चों के लिए लिखे जाने वाले साहित्य से माना जाता है। बच्चों की मनोग्रंथियों को गहरे समझकर जो कहानी, कविताएँ इत्यादि काग़ज़ पर उकेरा जाता है, वही बाल साहित्य है। हरिकृष्ण देवसरे, जयप्रकाश भारती, देवेंद्र कुमार, रमेश तैलंग, प्रकाश मनु, देवेन्द्र मेवाड़ी, दिविक रमेश जैसे साहित्यकारों ने बाल साहित्य के कई आयाम गढ़े हैं। गोविंद शर्मा, संजीव जायसवाल ’संजय’, नागेश पांडेय ’संजय’, मनोहर चमोली ’मनु’, मो. अरशद खान, मो. साजिद खान, देशबंधु शाहजहांपुरी, संतोष कुमार, मंजरी शुक्ला, नरेन्द्र सिंह नीहार, उमेशचन्द्र सिरसवारी, लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, गौरव वाजपेई ’स्वप्निल’ सतीश कुमार अल्लीपुरी समेत एक लंबी फ़ेहरिस्त है, जिन्होंने बच्चों के लिए प्रेरक, मनोरंजनपूर्ण और नई दिशा देने वाले बाल साहित्य का सृजन किया है।

बालमन के कुशल चितेरे कवि शिव मोहन यादव बहुमुखी प्रतिभा के धनी, अमर उजाला, कानपुर में उप-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। शिव मोहन यादव की बाल साहित्य सेवा को देखते हुए उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ‘उमाकांत मालवीय युवा बाल साहित्य सम्मान’ (2017) और बालकृष्ण शर्मा नवीन पुरस्कार (2018) से सम्मानित कर चुका है। युवा बाल साहित्यकार शिव मोहन यादव को अतुल माहेश्वरी और प्रतापनारायण मिश्र पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

श्री यादव बाल साहित्य में लगभग 18 सालों से सक्रिय हैं। बच्चों के लिए लिखने और बच्चों के बीच रहने का उनका एक लंबा अनुभव है। सरल और सहज भाषा में बाल साहित्य सृजन करने वाले शिव मोहन यादव कानपुर के ग्रामीण परिवेश से आते हैं। उनकी बाल कविताओं में वो पैनापन है कि बच्चे सहज ही गुनगुनाने लगते हैं।

श्री यादव ने बच्चों के लिए उत्कृष्ट बाल साहित्य का लेखन किया है। उनका एक ’लल्ला और बिट्टी’ कहानी संग्रह और ’सिंहों के अवतार तुम्हीं हो’, ’उड़ने वाली कार’ समेत दो बाल कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। इनकी रचनाएँ बच्चे भी बहुत चाव से पढ़ते हैं।

‘सिंहों के अवतार तुम्हीं हो’ कविता संग्रह लोकोदय प्रकाशन, लखनऊ से 2020 में प्रकाशित कवि की दूसरी पुस्तक है। इस अंक में कुल 66 कविताएँ हैं। इस कविता संग्रह की भूमिका प्रख्यात गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना, डॉ. अजय अटल ने लिखी है। सभी कविताएँ साहित्य का एक अनमोल दस्तावेज़ हैं। इस संग्रह की प्रत्येक कविता बाल-किशोर मन को छूने वाली है। इनमें सेना के जवान हैं, नारी है, बच्चे हैं, बड़े हैं, युवा हैं। यह संग्रह समाज के उस तबक़े का प्रतिनिधित्व करता है, जो कहीं न कहीं रास्ता तलाश कर रहा है। उसे रास्ता नहीं सूझ पा रहा है। नारी है, जिसको झांसी की रानी बनाने की बात श्री यादव अपनी कविताओं के माध्यम से करते हैं, तो सैनिकों के शौर्य को भी याद करते हैं। जामवंत बनकर बच्चों के बल को जगाने का काम कई कविताओं में श्री यादव बड़ी ही सहजता से कर गए हैं। पाँच सौ से अधिक बाल कविताएँ रचकर बच्चों में लोकप्रिय हुए शिव मोहन यादव के इस संग्रह की पहली कविता ‘सिंहों के अवतार तुम्हीं हो’ है। यह कविता बच्चों में जोश जगाने और उन्हें निरंतर नया करने के लिए प्रेरित करती है। पंक्तियाँ द्रष्टव्य हैं–

"भाग्योदय के द्वार तुम्हीं हो,
भारत की पतवार तुम्हीं हो।
नहीं सिमटने देना खुद को,
हिम-गिरि का विस्तार तुम्हीं हो।"

उक्त पंक्तियाँ जहाँ राही को भाग्योदय का द्वार बताती हैं, तो वहीं हिमगिरि से तुलना कर उसका उत्साह बढ़ाने का कार्य भी करती हैं। कवि बच्चों से अपने स्वाभिमान को नहीं डिगने का आह्वान करता है। भारत की शान महाराणा प्रताप से बात को जोड़कर युवा शक्ति को जगाने का काम रचनाकार ने यहाँ किया है। इसकी एक बानगी देखिए–

"स्वाभिमान नहीं झुकने देना,
राणा की तलवार तुम्हीं हो।
सर्वोपरि है भारत माता,
माँ सुत आखिरकार तुम्हीं हो।
नहीं भेड़ियों से डर जाना,
सिंहों के अवतार तुम्हीं हो।"

बच्चे भारत के कर्णधार हैं। रचनाकार को इस बात का भान है, तभी तो बच्चों को दृष्टिगत रखते हुए देश, समाज और कर्तव्यों पर दृष्टिपात करता है। बच्चे साहित्य को पढ़कर ही ज़िंदगी का पाठ सीखते हैं। यही साहित्य उन्हें अच्छे और बुरे का आभास कराता है।

जब देश आज़ादी की लड़ाई लड़ रहा था, तब कवियों और पत्रकारों ने अपनी क़लम के माध्यम से अहम भूमिका निभाई थी। युवा बालकवि शिव मोहन यादव का यह कविता संग्रह युवाओं को जगाने का कार्य करेगा, इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं है। डॉ. विष्णु सक्सेना लिखते हैं, “इस पुस्तक की अधिकांश रचनाएँ ओजमय हैं। ये रचनाएँ शहीदों और सैनिकों को याद कर उनकी स्मृति में लिखी गई हैं। कई कविताएँ व गीत बलिदानियों के प्रति श्रद्धा भाव में सक्षम हैं, तो दूसरी ओर कई रचनाएँ सैनिकों को साहस देने का हुनर रखती हैं।“

हमारे भारत को डॉक्टर, अध्यापक, सैनिकों ने सबसे ज़्यादा समृद्ध बनाया है। देश के विकास में इन जैसी कई विभूतियों का योगदान विस्मृत नहीं किया जा सकता। शिव मोहन यादव लिखते हैं–

“भारत माँ की रक्षा ख़ातिर अड़े रहेंगे,
सैनिक हैं हम सीमाओं पर खड़े रहेंगे।“

महारानी लक्ष्मीबाई ने देश और स्वाभिमान की ख़ातिर अपने प्राण त्याग दिए, लेकिन देश की आन-बान से समझौता नहीं किया। अँग्रेज़ों को लोहे के चने चबा दिए थे। शिव मोहन यादव भी नारी के स्वाभिमान को जगाते हुए आज की नारी को संदेश देते हैं–

“नारी स्वाभिमानी बन जा,
दुश्मन की हैरानी बन जा।
अगर उठे जो ग़लत नज़र तो,
झांसी वाली रानी बन जा।“

कई बार युवा दुख, मुसीबत देखकर टूट जाते हैं और हार मानकर आत्महत्या जैसा क़दम उठा लेते हैं, क्योंकि वे ज़िंदगी से हार मान लेते हैं। ऐसे लोगों को शिव मोहन यादव ’जीत पाओगे’ कविता में संदेश देते हुए लिखते हैं–

“हौसलों की जंग है तुम जीत पाओगे?
कंप्टीशन भी बहुत, तुम जीत पाओगे?
तुम लगन रखो, जुनून रखो, बढ़ो आगे,
है हमें विश्वास ’मोहन’ जीत पाओगे।“

कवि युवाओं को धैर्य रखने की प्रेरणा देते हुए आगे लिखता है–

“मत करो क़िस्मत पे भरोसा कभी भी दोस्तो,
भाग की रेखा हमें श्रम से बनानी चाहिए।
हो भले पहचान छोटी, आपकी ही हो मगर,
क्या किसी कंधे पे रख, गोली चलानी चाहिए?“

हारकर बैठ जाना किसी समस्या का समाधान नहीं है। ऐसे युवाओं को प्रेरित करते हुए कवि आगे लिखता है–

“तुम जीतोगे, विश्वास करो।
अपने अंदर अहसास करो॥
चिंता होना बेकारी है,
हर बैचेनी का नाश करो।“

’सिंहों के अवतार तुम्ही हो’ कविता संग्रह युवाओं में उत्साह जगाने का काम करता है। ’उठ मानव क्यों वक्त गँवाए’ ऐसी ही एक कविता है–

“चक्र समय का चलता जाए,
उठ मानव क्यों उम्र गँवाए।
मानव वो ही मानव है जो,
अपना स्वयं मुक़ाम बनाए।
भगनशील जीवन का चक्रण,
सफल वही जो, समझ जगाए।“

’सिंहों के अवतार तुम्हीं हो’ संकलन पढ़ने के बाद पता चलता है कि इस संग्रह की कविताएँ जीने का हौसला देती हैं, हारने के बाद उठ खड़े होने की प्रेरणा देती हैं और फिर से कार्य में जुट जाने को कहती हैं। अपनी सरल, सुगम भाषा में शिव मोहन यादव लिखते हैं–

“पैदल नभ तक जाना होगा,
चाँद सितारे लाना होगा।
जीवन स्वर्णिम करना है तो,
ख़ुद को बहुत तपाना होगा।
तुम हो जग के, अद्भुत इंसां,
यह विश्वास जगाना होगा।“

ये काव्य संग्रह देशभक्ति से ओत-प्रोत युवाओं में स्फूर्ति जगाने का काम करता है। इस संग्रह की कविताएँ बच्चों, युवाओं और बड़ों को प्रभावित करने में सक्षम हैं। निष्कर्ष कहा जा सकता है कि युवा बाल रचनाकार शिव मोहन यादव का कविता संग्रह “सिंहों के अवतार तुम्हीं हो“ युवाओं में जोश और हौसला देने का कार्य करेगा। नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करेगा और साहित्य जगत में इसका स्वागत किया जाएगा। इस संग्रह के कवि को सुंदर रचनाओं के संकलन के लिए मेरी ओर से बहुत-बहुत बधाई।

डॉ. उमेशचन्द्र सिरसवारी
चंदौसी (उ.प्र.)

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