अस्तित्व 

01-04-2021

अस्तित्व 

वैदेही कुमारी

सफलता की अंधाधुंध दौड़ में 
ख़ुद को खो रहे है हम 
जो हम हैं नहीं 
वो बनने का है वहम 
संस्कृति क्या, हमने तो खो दिया अपना वुजूद 
हम तो है यहाँ, पर अंतर्मन नहीं है मौजूद 
छूट गई सच्चाई और मासूमियत 
अब तो है बस झूठ संग आडम्बर 
दिल में उठता अब ना कोई बवंडर 
चाहे फैला हो चारों ओर दुख का समंदर 
हमको बस है ख़ुद से मतलब 
दूसरो को ख़ुश करने की नहीं है कोई तलब 
खो कर अस्तिव ख़ुद का 
क्या रास आएगी तुमको सफलता? 
 

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