बचपन और बेबसी

15-07-2026

बचपन और बेबसी

डॉ. शैली जग्गी (अंक: 301, जुलाई द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

खिलौने खेलने की उम्र में वह खिलौने बेचता है, 
वह बच्चा है अभी से बाप सा क्यों दिखता है। 
 
माँ की दवा की पर्ची को जेब में रखकर, 
उसकी एक ख़ुराक के लिए सिक्के टटोलता है। 
 
जिस हाथ ने रंग भरने थे उसके जीवन में, 
उसी हाथ में वह कमाई का हिसाब रखता है। 
 
स्कूल की घंटी उसे आवाज़ लगाती है अक़्सर, 
मगर घर भर की रोटी के लिए वह सिसकता है। 
 
कहते हैं देश का सुनहरा भविष्य हैं बच्चे, 
फिर भविष्य सड़कों पर यूँ क्यों बिकता है? 
 
खिलौने खेलने की उम्र में जो खिलौने बेचता है, 
नसीब, उसका बचपन किसके हिस्से लिखता है!! 

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