मुझे शौक़ है 

15-03-2026

मुझे शौक़ है 

बबिता कुमावत (अंक: 294, मार्च द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

मुझे शौक़ है, 
उन चेहरों से रूबरू होने का, 
जो बहुत कुछ दफ़न कर लेती हैं अंदर, 
लेकिन उनकी क़ुर्बानी को समझे कौन। 
 
मुझे शौक़ है, 
स्त्रियों के चेहरे के तनाव से मिलने का, 
जिनके तनावी रोमों के गड्ढे साफ़ झलकते हैं, 
पर उन गड्ढों की नींव तक जाए कौन। 
 
मुझे शौक़ है, 
उन कर्मचारियों की परछाईंं से बात करने का, 
जिनकी परछाईंं भी अनुभवों के गहरे घाव सुना जाती है, 
पर गहरे घावों को सहलाए कौन। 
 
मुझे शौक़ है, 
बुढ़ापे की उन सलवटों से बात करने का, 
जो बहुत कुछ कहना चाहती हैं, 
लेकिन उन सिलवटों की सुने कौन। 
 
मुझे शौक़ है, 
उन बच्चों से तफ़तीश करने का, 
जो बिना कारण बताए आत्महत्या की सोचते हैं, 
लेकिन उनके हृदय को टटोले कौन। 
 
मुझे शौक़ है
उन महिला कर्मचारियों को सुनने का, 
जो दब जाती हैं दोयम ज़िम्मेदारी के बोझ तले, 
लेकिन उनकी भावनाओं की क़द्र करे कौन। 
 
मुझे शौक़ है, 
उन गृहस्थ स्वामिनियों की गहराई तक जाने का, 
जो सुबह से शाम तक बच्चों व पति तक रह जाती हैं, 
लेकिन उनकी परेशानी को समझे कौन। 
 
मुझे शौक़ है, 
 उन बालिगों की गलियों तक जाने का, 
जो मनमर्ज़ी अपना ब्याह कर लेते हैं, 
जीते जी छुरी से रेत देते हैं गला बाप का, 
उस बाप की परवाह करे कौन।

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