तलाश

उमेन्द्र निराला  (अंक: 291, जनवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

बैठता हूँ 
जब दूर कहीं, 
कि मिले कोई अपना सा, 
जिसे बता सकूँ सब कुछ 

और जब मिले तो
वह सुने, समझे, बातें मेरी। 
और इस बात से भी 
मेरी तलाश पूरी हुई। 

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