रक्षा की डोर ही बेहतर

15-12-2025

रक्षा की डोर ही बेहतर

अक्षय भंडारी (अंक: 290, दिसंबर द्वितीय, 2025 में प्रकाशित)

 

एक गली से गुज़रा तो 
पतंग की डोर दिखी
न जाने कब वो 
खेल से हथियार बन गई। 
 
उस डोर ने उँगलियों पर ज़ख़्म लिखे
फिर एक समाचार मिला 
दिल दहल-सा गया। 
 
किसी पतंग की डोर से 
एक युवक की गर्दन कटी 
किसी पतंग की डोर से 
एक युवक की गर्दन कटी तो 
वह और वो मौत की ओर
ख़ामोश चलता चला गया। 
 
इससे अच्छा तो रक्षा की डोर है
अब क्या बचा, समझ भी आई, मन भी डरा
बेहतर है ऐसी डोर से हमेशा दूर रहें
क्योंकि इससे तो रक्षा की डोर ही अच्छी है
जो जोड़ती है . . . न कि जीवन से खेलती है। 

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