मेरी पेंसिल 

15-04-2026

मेरी पेंसिल 

प्रियांशी मिश्रा (अंक: 295, अप्रैल द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

लिखती है ये दिल से तत्परता से हर बार, 
बच्चों की ज्ञान-धारा या हो हॅंसी की फुहार
आए गर मुसीबत और टूट जाएँ सपने
यह पेंसिल ही दर्ज करती, बचाती है अपने
 
विचारों की तपिश हो ख़ुशहाली की बरसात
ज्ञान के फूल हों या सितारों भरी रात
भावों की बूॅंदों को प्रेम की वाणी में
यही मेरी पेंसिल नित लिखती कहानी में
 
स्कूल का पाठ यह पेंसिल याद कराती, 
अभ्यास कराती मुझे सफलता दिलाती है
लाल, नीली, पीली, छोटी-बड़ी-मंझौली
रंग-रूप नये-नये धर मुझको जिताती है
 
मेरी पेंसिल ख़ूब अभ्यास कराती है 
नित मुझे जिताती है सफल बनाती है। 

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