जीव

राजीव नामदेव ’राना लिधौरी’ (अंक: 289, दिसंबर प्रथम, 2025 में प्रकाशित)

 

जीवन में बस चाहता, जीव नया उत्साह। 
धर्म कर्म अच्छे रहें, हर पल सुंदर राह॥
 
देखा मानव जीव की, अधिक आयु सौ वर्ष। 
पर वह यह चाहत रखे, इन सबमें हो हर्ष॥
 
गर्मी वर्षा शीत में, रहना जाने जीव। 
ईश्वर ने‌ संसार में, सबको दी है नींव॥
 
सदा जीव को है मिला, करते रहना काम। 
जिसका फल मिलता रहे, निकट तुम्हें आ राम॥
 
अर्थ व्यर्थ मत खोजिए, जीव प्रभु का अंश। 
अपनी माया मत रचो, रहो उसी के वंश॥

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