डॉ. रमा द्विवेदी कृत ‘गंगा में तैरते मिट्टी के दीये’ काव्य संग्रह लोकार्पित
युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच (पंजीकृत न्यास) आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना राज्य शाखा एवं केंद्रीय हिंदी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय तृतीय दक्षिण भारतीय साहित्योत्सव 1 फरवरी-2026 (रविवार) केंद्रीय हिंदी संस्थान के सभागार, बोअनपल्ली में आयोजित किया गया।
डॉ. रमा द्विवेदी (अध्यक्ष, आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना राज्य शाखा) एवं महासचिव सरिता दीक्षित ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि यह कार्यक्रम डॉ. फत्ताराम नायक (क्षेत्रीय निदेशक, केंद्रीय हिंदी संस्थान) की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. ऋषभदेव शर्मा (परामर्शी, हिंदी) मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी, (हैदराबाद) विश्विष्ट अतिथि डॉ. राजीव सिंह ‘नयन’ (शिक्षाविद एवं वरिष्ठ साहित्यकार) एवं ओम प्रकाश शुक्ल (राष्ट्रीय महासचिव, युवा उत्कर्ष दिल्ली) सम्माननीय अतिथि प्रदीप कुमार दत्त (संयुक्त सचिव, हिंदी महाविद्यालय, हैदराबाद) विवेक बादल बाजपुरी (प्रभारी, उत्तराखण्ड) एवं प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमा द्विवेदी मंचासीन हुए।
सभी अतिथयों के द्वारा दीप प्रज्ज्वलन किया गया एवं कार्यक्रम का शुभारम्भ तृप्ति मिश्रा (सह संयोजिका) के द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। तत्पश्चात् नगर की लब्ध प्रतिष्ठ वरिष्ठ साहित्यकार स्व. डॉ. अहिल्या मिश्र को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
अध्यक्ष डॉ. रमा द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत शब्द पुष्पों से किया और शॉल-माला और पौधे द्वारा अतिथियों का सम्मान सभी सदस्यों के द्वारा किया गया। विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय महासचिव ओमप्रकाश शुक्ला ने संस्था का परिचय एवं उसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। प्रदेश इकाई की महासचिव सरिता दीक्षित ने राज्य शाखा की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।
‘गंगा में तैरते मिट्टी के दीये’ काव्य संग्रह का परिचय देते हुए विशिष्ट अतिथि डॉ. राजीव सिंह ‘नयन’ ने कहा, “इसका शीर्षक ही लोक-संस्कृति, आस्था, जीवन यात्रा, त्याग, तपस्या आदि के भाव को समेटे हुए है और पाठक से अत्यंत गहराई से पठन और चिंतन की माँग करता है। संग्रह में शिल्प और संरचना की दृष्टि से पूर्णतः अनुशासन से बँधी कविताएँ संगृहीत हैं। छंद-अनुशासन, भाव-संयम, प्रतीक-संतुलन इन तीनों का समन्वय इस संग्रह को काव्य-अनुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण बनाता है। वह कृति भावात्मक प्रमाणिकता, संरचनात्मक अनुशासन, वैचारिक स्पष्टता और सहित्यिक गुणों को एक साथ लेकर चलती है। आश्चर्य यह है कि पाठक इन रचनाओं में डूबता है तो बाहर निकलना नहीं चाहता।”
तत्पश्चात् मुख्य अतिथि एवं सभी अतिथियों के द्वारा “गंगा में तैरते मिट्टी के दीये” काव्य संग्रह का लोकार्पण किया गया।
मुख्य अतिथि प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने कवयित्री डॉ. रमा द्विवेदी के काव्य संग्रह “गंगा में तैरते मिट्टी के दीये” सशक्त कृति पर अपने महत्त्वपूर्ण विचार रखते हुए “हाइकु-ताँका और सेदोका रचनाओं के सुन्दर पक्षों की गहनता, कोमलता और आत्मिक सौंदर्य से परिचय कराया। उन्होंने कहा कि कम शब्दों में कविता लिखना बड़ी चुनौती है। भाव अगर नहीं होंगे तो वह रचना केवल वक्तव्य बनकर रह जाएगी लेकिन डॉ. रमा की कविताओं में गेयता है और पंक्तियों में सुन्दर तारतम्य है। जापानी परिधान में यह भारतीयता का उत्कृष्ट काव्य संग्रह है। उन्होंने आवरण पृष्ठ और शीर्षक को बहुत सुन्दरता से परिभाषित करते हुए कहा कि “गंगा में तैरते मिट्टी के दीये “शीर्षक सार्थक है। तैरते दीये काल का प्रवाह है जिसमें हम सब तैर रहे हैं और यह प्रवाह सतत गतिशील रहता है, कभी रुकता नहीं है। उन्होंने कहा कि कम शब्दों में अधिक भाव व्यक्त करना कविता की सामर्थ्य होती है और डॉ. रमा ने इस अनुशासन को बहुत अच्छी तरह से निभाया है। विचारों और भावों को प्रतीकों द्वारा चित्रात्मक शैली में ढालना वे अच्छी तरह जानती है। उत्कृष्ट काव्य संग्रह के लिए उन्होंने डॉ. रमा को बधाई प्रेषित की।”
सम्माननीय अतिथि प्रदीप कुमार दत्त ने और विवेक बादल बाजपुरी ने डॉ. रमा द्विवेदी को उत्कृष्ट काव्य संग्रह के लिए अपनी शुभकामनाएँ एवं बधाई प्रेषित की।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. फत्ताराम नायक जी ने डॉ. रमा द्विवेदी के काव्य संग्रह ‘गंगा में तैरते मिट्टी के दीये’ पर विचार रखते हुए कहा, “काव्य संग्रह की हर रचना का रंग भारतीय है और संग्रह सभी रचनाएँ मानवीय संवेदना से सम्पृक्त एवं लोक जीवन के समीप है।”
राष्ट्रीय अध्यक्ष रामकिशोर उपाध्याय जी ने डॉ. रमा द्विवेदी को उनके काव्यसंग्रह के लोकार्पण पर तकनीकी माध्यम से अपना अपना वक्तव्य और सन्देश प्रेषित किया। प्रथम सत्र का सञ्चालन बहुत ही कुशलता पूर्वक वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुषमा देवी के द्वारा किया गया।
द्वितीय सत्र में काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता प्रो. ऋषभदेव शर्मा जी ने की।
मुख्य अतिथि डॉ. फत्ताराम नायक, विशिष्ट अतिथि ओमप्रकाश शुक्ल, विवेक बदल बाजपुरी, डॉ. सुरभि दत्त (इकाई कोषाध्यक्ष) महासचिव सरिता दीक्षित मंचासीन हुए। सत्र का सञ्चालन शिल्पी भटनागर (संगोष्ठी संयोजिका) ने किया।
काव्यगोष्ठी से पूर्व कार्यकारिणी के सभी सदस्यों का शॉल-माला से सम्मान किया गया। प्रो. ऋषभदेव शर्मा एवं डॉ. रेखा शर्मा के जन्मदिन पर केक काटकर उनका जन्म दिन मनाया गया और शुभकामनाएँ दी गईं। अध्यक्ष डॉ. रमा द्विवेदी का सम्मान तेलंगाना साहित्य भारती संस्था, डॉ. राधा कृष्णन स्वयं शिक्षक सहायता समूह, शोभा देशपांडे, उमा सोनी, सविता सोनी तथा कार्यकारिणी के सभी सदस्यों के द्वारा शॉल-माला द्वारा किया गया।
काव्य गोष्ठी में विविध रंग की सुन्दर-सुन्दर रचनाओं का पाठ उपस्थित निम्नलिखित सभी रचनाकारों ने किया। बी स्वाति, शकुंतला मिश्रा, मोहिनी गुप्ता, तृप्ति मिश्रा, विनोद गिरी अनोखा, दर्शन सिंह, उमा देवी सोनी, सविता सोनी, भोला सिंह, जीतेन चौहान, डॉ. राजीव सिंह, विवेक बादल बाजपुरी, शोभा देशपांडे, ओम प्रकाश शुक्ल, डॉ. सुरभि दत्त, डॉ. फ़त्ताराम नायक, डॉ. सुषमा देवी, डॉ. रमा द्विवेदी, शिल्पी भटनागर, सरिता दीक्षित ने काव्यपाठ किया। प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने अध्यक्षीय प्रतिक्रिया देते हुए कहा-आज की इस काव्य गोष्ठी में विविध विधाओं की रसयुक्त रचनाओं ने सभी का मन मोह लिया और वातावरण को ख़ुशनुमा बना दिया। उन्होंने अध्यक्षीय काव्यपाठ राधा कृष्ण के संवाद पर आधारित रचना ‘हे चारुशीले’ सुनाकर सभी को प्रेम-रस से सराबोर कर दिया।
सम्पूर्ण कार्यक्रम का आभार वरिष्ठ सहित्यकार डॉ. सुरभि दत्त (कोषाध्यक्ष) ने उपस्थित सभी सम्माननीय अतिथियों एवं साहित्य प्रेमियों को कार्यक्रम की सफलता में सहयोग देने हेतु आभार ज्ञापित किया और काव्य संग्रह “गंगा में तैरते मिट्टी के दीये” के लोकार्पण एवं परिचर्चा के लिए कवयित्री डॉ. रमा द्विवेदी को बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित की। इस अवसर पर डॉ. रेखा शर्मा, सजग तिवारी, डिम्पल मिश्रा, डॉ. राधा, डॉ. एस एल द्विवेदी, डॉ. संदीप, नवीन, एवं कई संस्थाओं के पदाधिकारी गण, नगर के गणमान्य साहित्य प्रेमी सहित लगभग 60 लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की।