स्त्री रूप माँ
ऋषिका कुमारी
माँ तुम महान हो
इसलिए नहीं कि तुम माँ हो
पर क्योंकि तुम एक स्त्री हो
तुम दुर्गा, तुम महाकाली हो
अन्नदाता मेरी, लक्ष्मी भी तुम्ही हो
वह बरसात, वह शरद, वह पवन तुम हो माँ
मेरी भूख और मेरी आस हो
माँ क्योंकि तुम एक स्त्री हो
मैं कैसे कहूँ कि तुम बस मेरी हो
यह संसार भी तो स्त्री से बना है
तो तुम इस संसार की माँ हो ना
कोख में अपनी पनाह देने वाली तुम महारानी हो
मेरा लालन-पालन करने वाली, मेरी मालकिन
घर सँभालने वाली घरवाली हो तुम माँ
मुझे शिक्षा देने वाली, मेरा विद्यालय हो
मैं शायर तो मेरी ग़ज़ल हो तुम माँ
मैं माली, तुम मेरी फूल जैसी माँ
मुझे पुण्य का फल देने वाली भगवान
मेरे पाप हरने वाली महात्मा हो तुम माँ
पूरा संसार तुमसे है ना
पर सत्य कहूँ...
तुम बहुत प्यारी हो माँ
क्योंकि तुम मेरी हो माँ।