शतरंज की बिसात 

15-01-2026

शतरंज की बिसात 

हरदीप सबरवाल (अंक: 292, जनवरी द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

प्यादे सब से पहले मारे जाते हैं 
उनका काम ही होता है 
राजा रानी की रक्षा करते मिट जाना 
हाथी, घोड़ों, ऊँटों की क़ीमती जान बचाना, 
खेल तब तक ही चलता है 
जब तक राजा है
  
प्यादे एक क़दम ही चल सकते हैं 
वे तिरछे नहीं जाते, लंबी छलाँग नहीं 
लगाते, और ना ही राजा के मुँहलगे 
घोड़ों से ढाई घर चल सकते हैं, 
 
इतिहास की कहानियों में, 
तमाम तरह की चर्चाओं में और 
दुनियाँ की तमाम तहरीरों में 
समाचारों में छाए रहते हैं 
हाथी, घोड़े, ऊँट और राजा-वज़ीर, 
 
प्रेम कहानियों से लेकर 
विजय गौरव गाथाओं में 
राजतंत्र से लेकर लोकतंत्र की 
महान इबारतों में 
प्यादे कहीं नहीं मिलते, 
वे दब जाते हैं चीन की दीवारों में, 
पिरामिडों के भारों में, 
महलों और क़िलों की बुनियादों में 
दंगों और फसादों में 
और तमाम तरह के शस्त्रों के वार सहते, 
प्यादे बस टिके रहते हैं अपने एक खाने में 
जब तक कि शासन-सत्ता का हाथ आगे बढ़ 
उन्हें . . .
कि प्यादे सब से पहले मारे जाते हैं . . .  

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