शमा है एक परवाने बहुत
शैली भागवत ‘आस’
मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़अल
1222 1222 12
शमा है एक परवाने बहुत
हैं इससे लोग अनजाने बहुत
समझते थे हमें अपना कभी
वही हैं आज बेगाने बहुत
नहीं है होश अपने आप का
हुए हो आप दीवाने बहुत
हमें भी बोलना अब आ गया
सुने हैं रोज़ जो ताने बहुत
शहीदों के घरों में देखना
नज़र आएँगे वीराने बहुत
उलझ कर रह गए यूँ हाथ में
बुने तक़दीर के बाने बहुत
भले हासिल हमें मंज़िल नहीं
मिले राहों में नज़राने बहुत