हाथ में अख़बार आया
शैली भागवत ‘आस’
फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन
2122 2122
हाथ में अख़बार आया
खार से भरमार आया
यूँ समझते ही तुझे माँ
मन भरा, आभार आया
बेबसी करती है बेबस
आदमी लाचार आया
काम कल जो टाल डाला
आज बनकर भार आया
ख़्वाहिशें कंधों पे टाँगें
शहर में बेकार आया
आबरू जब लुट गयी तो
देखने संसार आया
प्यार के बंधन तले बस
झूठ का व्यापार आया