पंछी का उड़ जाना तय है
शैली भागवत ‘आस’
फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन
22 22 22 22
पंछी का उड़ जाना तय है
सबका एक बहाना तय है
तय है अगर किसी का आना
तो फिर उसका जाना तय है
अगर भरोसा तोड़ दिया तो
मन से भी गिर जाना तय है
आप इरादा कर बैठे हो
फिर तो मंज़िल पाना तय है
मेरा-तेरा, सबका इक दिन
मिट्टी में मिल जाना तय है
ग़म हैं, आँसू भी हैं तो फिर
रोना तय, मुस्काना तय है
‘आस’ बड़ी है जीने की पर
मौत का इक दिन आना तय है