प्रमोशन
पूर्णिमा मित्रा
“अरे वाह, इतने शार्ट नोटिस में इतना सुंदर हाउस जनरल की प्लानिंग कर ली!” लैपटॉप पर हाउस जनरल अंकुर की पीडीएफ़ देखते हुए योगेश जी बोले।
“सर, थैंक यू। मैंने यह डिपार्टमेंट ज्वाइन करने से पहले जनर्लिज़्म में डिग्री ली है। इसीलिए इसे घर ले जाकर, पूरा किया,” ट्विंकल ने आँख नीची करके जवाब दिया।
“अरे तुम्हारी फ़ालतू रामायण सुनने के चक्कर में एक ज़रूरी बात तो भूल गया। अंकुर की विशिष्ट सम्पादकीय सलाहकार के रूप में माधवीजी का नाम देना मत भूलना।” योगेश जी आदेश के देने के अंदाज़ में बोले।
“लेकिन सर कल जब मैं आपके कहने से उनके पास संपादकीय आलेख माँगने गयी तो उन्होंने मुझे फटकार दिया।”
“फोन पर उन्होंने मुझे भी खरीखोटी सुनाई थी। लेकिन उससे क्या फ़र्क़ पड़ता है! आख़िर वो हमारे बॉस की बीबी है। एक लोकप्रिय नेता की बेटी और अफ़सर की बीवी होना क्या मामूली बात है,”अचानक योगेश जी का स्वर दयनीय हो गया।
“अच्छा, ऐसा करते हैं कि आलेख के साथ उनके जवानी की एक ख़ूबसूरत फोटो भी लगा देते हैं,” ट्विंकल ने मुस्कुराते हुए अपनी राय दी।
“शाबाश, इसी तरह अपने दिमाग़ की खिड़कियाँ खुली रखो। बहुत आगे जाओगी।”
इतना कहकर बॉस अपने प्रोमोशन के सपने देखने में खो गये।