एग्ज़ीबिशन

01-09-2025

एग्ज़ीबिशन

पूर्णिमा मित्रा (अंक: 283, सितम्बर प्रथम, 2025 में प्रकाशित)

 

रजनी के घर पहुँचकर, सौरभ मुस्कुराता हुआ बोला, “दीदी, ज़रा घर का ख़्याल रखियेगा। हम लोग आउटिंग में जो आ रहे हैं।”

रजनी ने सौरभ को तिरछी नज़रों से देखते हुए अपनी जिज्ञासा प्रकट की, “क्या बात है, इन दिनों बोत आउटिंग हो रही है?” 

“हे ऽ‌ऽ . . . कोई एग्ज़ीबिशन देखने का रिक्वेस्ट करे तो जाना तो जाना तो पड़ता है, फिर में लज़ीज़ लंच और हाई टी का मज़ा ही कुछ और है,” कहकर सौरभ मुस्कुरा दिया। 

हैरत में पड़ी रजनी सौरभ को आपादमस्तक देखते हुए प्रश्नवाचक मुद्रा में पूछ बैठी, “आखिर मैं भी सुनूँ ऐसा कौन-सा एग्ज़ीबिशन है, जहाँ मेहमानों को खाना-पीना फ़्री में सर्व किया जाता है?” 

“लड़की दिखाने वालो के यहाँ और कहाँ? भई इस सड़ी गर्मी में मूड फ़्रेश करने का कोई बहाना तो चाहिये।” 

इतना कहकर सौरभ हँसता हुआ वहाँ से चल दिया।

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