नयी दृष्टि

01-05-2026

नयी दृष्टि

रंजना जैन (अंक: 296, मई प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

वह दिन अब कुछ दूर नहीं
जब दृष्टि नयी मिल जाएगी। 
कथा-कहानी “संजय” की, 
अब इतिहास नहीं रह पायेगी। 
 
शोर उठा है नयी खोज का, 
अवसर है यह बड़ी मौज का। 
हर वस्तु बदल ही जाएगी, 
‘चिप’ “स्मार्ट और हो जायेगी। 
 
कार्य जटिल थे ईश भरोसे, 
उनका भी अब हल निकला है। 
दृष्टिहीन की दुनियाँ जागी, 
पंगु गिरि पर चढ़ निकला है। 
 
ए आई का नया ज़माना
हरफ़नमौला, मस्त, दीवाना। 
कायाकल्प यह कर जायेगा, 
“चिरागअलादीन” बन जाएगा। 
 
तकनीकी जग की बात निराली, 
विज्ञान जगत में रोज़ दिवाली। 
अब क्या बाक़ी रह पायेगा
मानव “रोबोटिक” बन जाएगा! 

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