मैंने कटते देखा है
सौरभ नोरोजी
नन्हा-सा वह बीज लगा है,
पेड़ अभी बन जायेगा।
बढ़ता-बढ़ता झूम-झूम और,
मस्त मग्न लहरायेगा
गिर जायेंगे पत्ते थल पर,
फिर वापस आ जायेंगे।
छाँव देता, फल देता,
देता शुद्ध पवन है,
कुछ देता भी समस्याएँ है,
पर काट देना कोई हल नहीं।
दूर कीजिए समस्याएँ,
पर उखाड़ देना कोई हल नहीं।
नवयुवक प्रयास है करता
बचा इसे वह पाये।
भीड़ में वह चिल्लाता रहा पर,
शांत वहाँ सब खड़े हुए।
लेते न हों जैसे वे कभी,
शुद्ध पवन, छाँव और फल।
सरकार के दल्ले आते हैं,
और पेड़ काट कर जाते हैं
लोग समस्याएँ देखें पर,
लाभ न देखे पाये!
फल देता, छाँव देता है,
और शुद्ध पवन दे जाये।
पर फिर भी लोग कहते रहे,
काट दिया इसे जाये।
नवयुवक रोता रहा,
पर बचा न उसको पाये।
अंत यहीं हो जाता है,
और पेड़ काट दिया जाता है।