देश भक्ति का पैमाना 

15-05-2024

देश भक्ति का पैमाना 

दीपक कोहली (अंक: 253, मई द्वितीय, 2024 में प्रकाशित)

 

देश के हर व्यक्ति की भारतीय होने की परिभाषा एक जैसी है, मगर देशभक्ति के पैमाने अलग-अलग हो सकते हैं। आजकल कुछ लोग सच्चे भारतीय और देश भक्त होने का दावा करते हैं और वही लोग अपने धर्म और जात के अलावा अन्य धर्म-जात के लोगों से नफ़रत करते दिखाई देते हैं। अपनी इस नफ़रत की आग में वो तरह-तरह के मुद्दों को उठाकर घी डालने का काम करते है, जबकि यही लोग देश के कई क़ानूनों का सही से पालन तक नहीं कर पाते हैं।

दुनिया का कोई भी देश वहाँ के लोगों से बनता है। अगर किसी देश की जनता ग़रीबी, भुखमरी, अत्याचार और महँगाई आदि से परेशान है तो मान लीजिए वह देश या तो किसी तानाशाह राजा का ग़ुलाम है या फिर वहाँ के राजनेताओं ने उस देश के लोगों को अपना ग़ुलाम बनाकर रखा है। 

अपार संसाधनों और सेवाओं का उपभोग करने वाले राजनेता और उनके चेले-चपाटे ही सच्चा देश भक्त होने का झूठा दंभ भरते हैं। एक ग़रीब नागरिक ईमानदारी से मज़दूरी कर दो वक़्त की रोटी खा रहा है, तो क्या यह सच्ची देश भक्ति नहीं है? शायद नफ़रती चींटुओं के अनुसार नहीं होगी, मगर एक सच्चे देश भक्त होने के लिए आपको बस ईमानदारी से अपना काम करना होता है। हाँ, आपका काम देश व संविधान के विरुद्ध ना हो और आपका काम ग़लत ना हो यानी मानवता के ख़िलाफ़ ना हो। बाक़ी अपनी देशभक्ति को नफ़रती लोगों के पैमाने से मत मापिए। देश का हर ज़िम्मेदार नागरिक देश भक्त है। 

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