साहस का उजाला
मधुलिका मिश्रा
अदृश्य हर
डर होगा,
जब भीतर
साहस होगा।
ना ख़बर
दिन या रात की,
ना फिर कोई
पुराना ज़ख़्म होगा।
मिट जाएँगे
सिलसिले
अविश्वास के,
बस विश्वास होगा।
टूट जाएगा
भ्रम हार का,
तो बुलंद
हर हौसला होगा।