नारी का बलिदान

01-06-2026

नारी का बलिदान

ऋषिका कुमारी (अंक: 298, जून प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

हर वह स्त्री जिसने शृंगार के ऊपर ज्ञान को चुना है
उसने अपने मन को जीता है
दुनिया की नज़रों में जो आशंकाएँ थीं, उन्हें झेला है
हज़ारों अग्नि परीक्षाएँ दी हैं
घर से निकलने के लिए घरवालों से लड़ी है
उन्हें फूल नहीं काँटे दिए गए हैं
ख़ूबसूरत नहीं, कठोर कहा गया है
उन्हें प्रेम नहीं, चुनौतियाँ ही दी गई हैं
हर एक चौखट लक्ष्मण रेखा सी बनाई है
उनके ममत्व पर उपहास किया गया है
पर नारी ने सीता बनकर लक्ष्मण रेखा लाँघी है
दुर्गा बन चुनौतियों का संघार किया है
अपनी शक्ति का प्रचंड प्रसार किया है
परन्तु अपनी ममता और कोमलता से समझौता नहीं किया है
हर वह स्त्री जिसने शृंगार के ऊपर ज्ञान को चुना है
उसने संसार के अस्तित्व को एक नया आकार दिया है

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