लॉकडाउन में

15-09-2021

लॉकडाउन में

अवनीश कुमार

सन्नाटा पसरा
हर गली, हर कूचे और
हर नुक्कड़ पर;
शहर की गलियाँ हो गईं
किसी स्याह जंगल के 
सुनसान रास्तों-सी;
खोमचे, ठेले अब
ग़ायब हो गए हैं;
अब वे मलिन बस्तियों से 
कालोनियों में नहीं आते; 
अब चौबीसों घण्टे 
बेबस हैं वे
बदबूदार घरों में रहने को;
दीवारों में बंद ज़िंदगियाँ
तलाश रहीं हैं
खुला आसमान।

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें