प्यार की चाहत

01-06-2026

प्यार की चाहत

सपना साहनी (अंक: 298, जून प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

प्यार था तुझसे तभी तो तुझसे मिलने की चाहत थी, 
प्यार ना होता तो तुझे खोने का दर्द भी ना होता। 
तेरे बिना जीने का दर्द भी ना होता, 
वह जो एक एहसास था तुझसे बिछड़ने का, वह भी ना होता। 
 
चाहत थी जो तेरे आने की, 
तुझसे ख़ूब सारी बातें करने की, 
वह भी ना होती। 
 
प्यार था तुझसे तभी तो तुझसे मिलने की चाहत थी। 
 
पता है इस दिल को कि तुझसे मिलना मुमकिन नहीं है, 
फिर भी यह दिल की चाहत है। 
दिल की चाहत को रोक पाना मेरे बस की बात नहीं। 
 
पर तुझसे मिलने की अब मेरी कोई आस नहीं। 
प्यार था तुझसे, तभी तो तुझसे मिलने की चाहत थी। 

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