लड़की

सपना साहनी (अंक: 292, जनवरी द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

लड़की होना आसान नहीं, 
हर घर की पहचान है लड़की। 
 
लड़की बिना आँगन सूना लगे, 
लड़की बिना हर घर अधूरा ही लगे। 
 
घर की ज़िम्मेदारियों में बँधी लड़की, 
घर की चौखट से बाहर न जाए लड़की। 
 
पढ़ाई के लिए लड़ती–झगड़ती है, 
फिर भी सब कुछ हँसकर सह जाती है लड़की। 
 
हर घर का सम्मान है लड़की, 
पापा का ग़ुरूर है लड़की। 
 
माँ की पहचान है लड़की, 
फिर भी एक दायरे में बँधी है लड़की। 
 
छोटी–छोटी ख़ुशियों में ख़ुश हो जाती है लड़की, 
सबकी ख़ुशी के लिए अपने सपनों की क़ुर्बानी देती है लड़की। 
 
हर मोड़ पर ख़ुद को साबित करती है लड़की, 
फिर भी हर हाल में मुस्कुराती है लड़की। 
 
ऐसी होती है लड़की। 

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