पप्पू का गप्पू
अनिकेत सिंह
एक था लड़का, जिसका नाम था पप्पू। पप्पू वैसे तो चतुर और चालाक था, लेकिन बहुत बड़ा गप्पी था।
बात-बात पर बढ़ा-चढ़ाकर बातें करना उसकी आदत थी। जहाँ भी मौक़ा मिलता, वह गप्पें मारकर ख़ुद को बहुत होशियार समझता था।
हर रोज़ वह वहाँ पहुँच जाता, जहाँ उसके दोस्त खेल रहे होते और फिर अचानक चिल्लाता, “साँप आया . . . साँप आया।”
फिर धीरे से सबकी नज़र बचाकर वहाँ से भाग जाता। पप्पू की इस झूठी चीख-पुकार से सारे दोस्त डर जाते। सब इधर-उधर भाग जाते, लेकिन असल में वहाँ कोई साँप होता ही नहीं था।
दूर छिपकर पप्पू यह सब देखता और ख़ुश होता। उसे इस तरह झूठ बोलकर सबको डराने में मज़ा आता था।
फिर तो वह बारबार ऐसा करने लगा। जब भी उसके दोस्त खेलते, वह “साँप आया . . . साँप आया।” कहकर सबको डराता। सब डरकर भागते और वह मन ही मन आनंद लेता।
कुछ दिन ऐसा ही चलता रहा।
फिर धीरे-धीरे सबको पता चल गया कि यह पप्पू की शरारत है। वह सबको डराने के लिए झूठ बोलता है और मज़े लेता है। इसलिए एक-एक करके सब दोस्तों ने उससे दोस्ती तोड़ दी।
आख़िर किसी को भी पप्पू पर भरोसा नहीं रहा। वह अकेला पड़ गया। एक दिन की बात है। पप्पू तालाब में नहाने गया। उसके दोस्त पास ही खेल रहे थे। तभी अचानक पप्पू ने तालाब के किनारे सचमुच एक साँप देखा!
साँप को देखकर सारे दोस्त डरकर भाग गए! पप्पू तालाब में था। बाहर निकले तो साँप का डर और पानी में ज़्यादा देर कैसे रहे?
साँप से बचने के लिए पप्पू ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाया, लेकिन उसे बचाने कोई नहीं आया। वह बुरी तरह फँस गया। अगर पानी से बाहर निकले तो साँप काट ले और ज़्यादा देर पानी में रहे तो बीमार पड़ जाए!
आख़िर बहुत देर बाद पप्पू ने हिम्मत की और पानी से बाहर निकला। जैसे-तैसे भागने लगा, तभी सारे दोस्तों ने उसे घेर लिया और धक्का देकर साँप की तरफ़ धकेल दिया!
पप्पू के तो होश उड़ गए। वह बहुत डर गया।
लेकिन जैसे ही वह साँप के पास पहुँचा, उसे पता चला कि वह असली साँप नहीं, बल्कि नक़ली साँप था! सभी दोस्त हँसने लगे, “हा-हा-हा।”
एक दोस्त ने कहा, “तू रोज़ हमें झूठ बोलकर डराता था न, तो आज तेरी बारी थी। यह नक़ली साँप हमने ही तुझे डराने के लिए रखा था।”
सारे दोस्त हँस रहे थे।
पप्पू को अपनी ग़लती समझ में आ गई। वह शर्म से सिर झुकाकर खड़ा रह गया। वह रोज़ सबको झूठ बोलकर डराता था और परेशान करता था। यह कितना ग़लत था, आज उसे समझ में आ गया।
उसने अपनी ग़लती मान ली और सब से माफ़ी माँग ली। दोस्तों ने बड़ा दिल दिखाकर पप्पू को माफ़ कर दिया। उस दिन के बाद पप्पू ने हमेशा के लिए गप्पें मारना छोड़ दिया।