मेरे नानाजी

01-04-2026

मेरे नानाजी

महिमा सामंत (अंक: 294, अप्रैल प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

क़िस्मत लाई मुझे आपकी 
नातिन बनाकर इस दुनिया में। 
शायद किया था मैंने 
बहुत अच्छा काम पिछले जनम में॥
 
उँगली पकड़कर 
चलना सिखाया मुझे आपने। 
मेरे बार बार गिरने पर 
देखते थे मेरे चलने के सपने॥ 
 
अब चल रही हूँ मैं, 
बिना गिरे बिना रुके। 
क्योंकि आप थे खड़े 
मेरे विश्वास बनके॥
 
मेरे हर अच्छे काम पर 
साथ देने वाले दुनिया के एक इन्सान। 
नाना हो आप मेरे ज़िन्दगी का 
सबसे प्यारा वरदान॥ 
 
हो आप मुझसे बहुत दूर 
पर आपका प्यार है मेरे संग भरपूर। 
क्योंकि बसते हो आप मेरे दिल के अंदर, 
जाने नहीं दूँगी मैं आपको दिल से बाहर॥ 
 
मेरी हर ख़ुशी और ग़म में आप मेरा साथ देते थे। 
मेरे मन की अनकही बातों को भी पहचान लेते थे। 
आपकी दुआओं से हिम्मत मिल जाती है, 
हर अँधेरे में भी रोशनी दिख जाती है॥
 
आप जहाँ कहीं भी हो, 
आपका आशीर्वाद मुझपर हो। 
आपकी नातिन हमेशा आपको याद करेगी। 
नानाजी के नाम को गर्व से ऊँचा रखेगी॥

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