मयंक शर्मा – सवैया – अनन्य अनुराग

01-02-2026

मयंक शर्मा – सवैया – अनन्य अनुराग

मयंक शर्मा (अंक: 293, मार्च प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

देह लसैं पट-पीत अरु कल कानन कुण्डल छाजत सोहैं,
शीश पे सोहत मोरपखा, गल-माल बिराजति मोहति मोहैं;
गोल-कपोल रूचैं झलकैं, मुख-साँवरे-मोहन-राजति जोहैं;
नाथ के नाम अपार-अनंत, जा जग में नहिं जानत कोहैं?

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