कौन ये?
दीपा जोशीकौन बन प्रणय नाद
विरह वेदना को तोड़ता
है कौन जो श्वासों की डोर
तोड़कर फिर जोड़ता।
कौन बन अश्रु
तृषित लोचनों में डोलता
है कौन जो लघु प्रणों में
बन रुधिर दौड़ता ।
कौन बन संगीत
मधु मिलन गीत बोलता
है कौन जो पिघल श्वासों में
मन के भेद खोलता
कौन बन दीप
चिर तिमिर को घोलता
है कौन जो निस्पंद उर को
फिर जीवन की ओर मोड़ता..