कल क्या होगा?

01-02-2026

कल क्या होगा?

प्रणव राज (अंक: 293, फरवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

आज निकला सूर्य अम्बर से,
सुहानी दोपहरी में फूल खिला अम्बर से,
सारे जगह रंग बिखरे थे, 
जंगल, पेड़, पंछी सब निखरे थे।
 
आकाशं था नीला, 
सब था ठीक किसी का चेहरा न था पीला,
आसमान में अमन था, सब था साफ़, 
कल क्या होगा कोई न सका भाँप।
 
हवा थी स्थिर, हवा थी शांत, 
सब था मंगल, कोई न था एकांत, 
सुहाने दिन में, अनहोनी भी होगी, 
पता था कि होगी, पर कब होगी?
 
उस सुबह तो सब ठीक था, 
उस शाम थी सब ठीक था, 
पर, उस रात कुछ ऐसा हो गया, 
जिसका जो था, सब खो गया।
 
सूर्य को तो अंधेरा लाना ही था,
अंधेरे को तो आना ही था, 
सब कुछ मिट गया, 
वह अचानक से आ गया।
 
सारे लोग चुप थे, सब हैरान थे, 
समय के काटे भी हैवान थे, 
कल था जो ठीक, वह आज मिट गया, 
सब था जो ठीक, वह अचानक मिट गया।

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