दूर गये पिया-परदेसिया
अशोक पटेल ‘आशु’
चमके बिजुरिया, गरजे बदरिया
बिन साजन के हिय-हूक लगाए
कुहके कोयलिया, बोले पपिहरा
प्रीत-पिया के यह संदेशा सुनाए।
दूर गये जब से पिया-परदेसिया
सजनिया घर में आँख बिछाए
प्रवासी पंछी तो लौट चले हैं
पर सजना क्यों नहीं लौट आए।
झाँके झरोखे से विरहिणी सजनी
चौखट को, बार-बार निहारे है।
उमड़-घुमड़ कर, यह बदरा बैरी
क्यों इतना बरसे, आँगन द्वारे है।
बिजुरिया चमके, बदरिया बरसे
पिया के मिलन की, याद सताए
न जाने कब आएँगे, यह साजन
सोच के यह नयन, नीर बरसाए।