अनुभव का होना

15-01-2026

अनुभव का होना

सिया लेखनी (अंक: 292, जनवरी द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

कविता:
प्रतीक्षा रही . . .!! 
किन्तु समय अपनी गति से गुज़रता रहा . . . 
और पता चला—
कुछ भी
स्थिर नहीं। 
 
सब
अस्थिर है—
सर्वत्र, हर चीज़ . . . 
सिवाय
सँभालने वाले के। 
 
फिर हम भी अस्थिर हुए, 
ख़िरामाँ-ख़िरामाँ . . . 
चाहे वह
फूलों का खिलना–मुरझाना हो, 
या गीत-संगीत का
सुर–बेसुर होना . . . 
चाहे वह
उम्र का गुज़रना ही क्यों न हो। 
 
वक़्त और उम्र का गुज़रना
अनुभव का होना नहीं। 
किसी भी चीज़ का
प्रत्यक्ष रूप से, 
समझ के साथ
घटित होना—
यही अनुभव का होना होता है . . . 

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