एक बार फिर मिला जाए
सौरभ नोरोजी
कमियाँ कुछ रही होंगी मुझमें भी और तुझमें भी
क्यों ना सब भुलाकर फिर एक बार और मिला जाये।
शायद मैं ग़लत था पर तुम्हारे लिए अनजान तो नहीं
जो हुआ वो सही था मगर
सब कुछ भुला देना आसान तो नहीं।
माना कि क़ाबिल नहीं हैं, जितने हो तुम
मगर तुम्हारा इस तरह छोड़कर जाना
हमारे लिए आसान तो नहीं।
तुम्हारा कुछ भी कह जाना
मेरे व्यवहार को ग़लत बताना और
मेरा कुछ न कहकर तुम्हारे लिए चुप रह जाना
मेरे लिए आसान तो नहीं।
सब कुछ भूलाना आसान हो तुम्हारे लिए
मगर तुम्हारा इस तरह जाना, तुम्हें भूल पाना
सारी बातों को मिटा पाना आसान तो नहीं।
तुम्हारे न कहने का फ़र्क़ नहीं पड़ता है मुझको
मगर तुम्हारा सालों की दोस्ती भी
तोड़ जाना आसान तो नहीं।
तुम याद करो या न करो मगर
तुम्हें भूल पाना आसान तो नहीं।
मगर मुमकिन है ये कि
सब कुछ भुला दिया जाए और
एक बार फिर मिला जाए।