प्यार की तान जब लगाई है

15-11-2008

प्यार की तान जब लगाई है

नीरज गोस्वामी

प्यार की तान जब लगाई है
भैरवी हर किसी ने गाई है

लाख चाहो मगर नहीं छुपता
इश्क़ में बस यही बुराई है

ख़्वाब देखा है रात में तेरा
नींद में भी हुई कमाई है

बांध रख्खा है याद ने तेरी
आप से कब मिली रिहाई है

जीत का मोल जानिये उससे
हार जिसके नसीब आई है

चाहतें मेमने सी भोली हैं
पर ज़माना बड़ा कसाई है

साथ जबतक चले लगे अपनी
साँस होती मगर पराई है

आस छोड़ो नहीं कभी 'नीरज'
दर्दे दिल की यही दवाई है

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