केप ऑफ़ गुड होप 

शेष अमित

बारह साल की वह छोटी लड़की,
तिपहिया सायकिल ठेले पर,
घरों से लेती है, हर सुबह कूड़े-
कूड़े की बारात में आया है आज,
बीते साल का बारह पन्नों का एक कैलेण्डर,
चमकदार रंगीन कैलेण्डर,
तीन सौ पैंसठ दिन, बारह महीने
बावन हफ़्ते,
झोली भर अमावस-पूनो,
जिसके प्रतिपद से लेकर
चतुर्दशियाँ भी अब निर्वासित है,
हर पन्ने पर छपे सुंदर चित्र,
शशिशेखर टँका है,
अपशिष्ट दिनों के ढेर पर.
दुर्लभ प्राप्ति ने,
आश्चर्य,खुशी और अपूर्व का अवलेह
लेप दिया है उसके चेहरे पर,
सायकिल ठेले के कूड़े पर,
फूलहीन गोभी के सुदर्शन चक्र,
बैंगन की शिखाओं और-
हारे आदमी के फटे धौंकनी के पन्नियों के बीच,
कैलेण्डर अब भी गर्वित है
र्वत-श्रृंखला के धवल शिखरों सा,
वह पन्ने पलटती है,
तिथियों के कुंकुम-बिंदियों में
उसे कोई रुचि नहीं है,
अपशिष्टों की आकाशगंगा में,
आज पाया है उसने सपने का तारा,
अब जब भी समय अपशिष्ट होता है,
या आवर्जना,
कूड़े बटोरती छोटी लड़की खुश हो जाती है |

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