अमेरिकी माफ़िया और अंडरवर्ल्ड पर आधारित उपन्यास: गॉड फ़ादर (The Godfather)

20-02-2019

अमेरिकी माफ़िया और अंडरवर्ल्ड पर आधारित उपन्यास: गॉड फ़ादर (The Godfather)

डॉ. एम. वेंकटेश्वर

औपन्यासिक साहित्य की उपविधाओं में अपराध जगत की कथाओं पर रचित कथा-साहित्य एक महत्त्वपूर्ण उपविधा है। इसका विकास सर्वप्रथम अँग्रेज़ी में हुआ। वैसे तो जासूसी उपन्यासों की एक सुदीर्घ परंपरा विश्व कथा साहित्य में मौजूद रही है किन्तु इनसे पृथक अंतर्वस्तु और परिवेश के साथ शक्तिशाली आपराधिक परिवारों की कहानियाँ सन् 60 के दशक से लोकप्रिय हुईं। इन पर आधारित उपन्यासों को अंडरवर्ल्ड और माफ़िया जगत के रोमांचक कथा-साहित्य के नाम से जाना जाता है। इन उपन्यासों में हिंसा और प्रतिद्वंद्विता का प्राधान्य रहता है। "द गॉड फ़ादर" इतालवी-अमेरिकी उपन्यासकार मेरियो पूजो द्वारा रचित एक अपराध कथा है। यह न्यूयॉर्क शहर में बसे अपराध जगत (माफ़िया) के एक कुख्यात सरगना "डॉन विटो कोर्लियोन" के परिवार की कहानी है। विटो कोर्लियोन इतालवी अंडरवर्ल्ड माफ़िया का प्रतिनिधि हुआ करता था। इस उपन्यास में सन् 1945 से 1955 के मध्य अंडरवर्ल्ड के कुख्यात गिरोहों में आपसी कलह से उत्पन्न रक्तिम महासंग्राम का इतिहास रचा गया है। लेखक मेरियो पूजो ने अपनी इस रचना से साहित्य को अपराध जगत की प्रयुक्तियों का एक विशाल कोश दिया है। अपराध-जगत के बोलचाल के मुहावरे और कोड भाषा का प्रचलन कथा-साहित्य में इसी उपन्यास से प्रारम्भ हुआ। गॉड फ़ादर उपन्यास ने साहित्य में माफ़िया-कथाओं की एक उपविधा को जन्म दिया। इस उपन्यास ने हॉलीवुड के फ़िल्म निर्माताओं को आकर्षित किया जिससे इस उपन्यास पर इसी नाम से सन् 1972 में फ़िल्म बनी जो अत्यंत लोकप्रिय हुई तथा फ़िल्म समीक्षकों द्वारा सराही गई। द गॉड फ़ादर, फ़िल्म ने उपन्यास की लोकप्रियता में वृद्धि की और इस तरह फ़िल्म देखकर लोग उपन्यास पढ़ने को प्रेरित हुए। इस उपन्यास की रचना मेरियो पूजो ने सन् 1968 में की थी। यह समूचे अमेरिका के अपराध जगत पर राज्य करने वाले एक गैंगस्टर की कहानी है। इसका कथा- नायक विटो कोर्लियोन अपने अपराध जगत को विस्तरित कर उस पर एकाधिकार प्राप्त करना चाहता है। यह उपन्यास अंडरवर्ल्ड में होने वाले सत्ता संघर्ष, भ्रष्टाचार और हिंसा के प्रसंगों से भरा है।

मेरियो पूजो का जन्म न्यूयॉर्क शहर के हेल्स-किचन में एक ग़रीब परिवार में हुआ था। यह परिवार मूलत: इटली का निवासी था जो निर्वासित होकर अमेरिका में बस गया। मेरियो पूजो बचपन से ही लेखक बनना चाहता था किन्तु उसकी माँ उसे रेलवे में नौकरी करके परिवार की ज़िम्मेदारी सँभालने के लिए प्रेरित करती रही। मेरियो की शिक्षा स्नातक डिग्री के लिए न्यूयॉर्क के सिटी कॉलेज में सम्पन्न हुई। इसके बाद वह अमेरिका के एयरफ़ोर्स में भर्ती होकर द्वितीय विश्वविद्ध में लड़ने के लिए चला गया। फौज में दृष्टि-दोष के कारण उसे लड़ाकू विमानों कि उड़ाने की अनुमति नहीं दी गई, इसके स्थान पर वह जर्मनी में अमेरिका का जन-संपर्क अधिकारी बन गया। सन् 1950 में मेरियो पूजो की "द लास्ट क्रिस्मस" नामक पहली कहानी "अमेरिकन वैनगार्ड" नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई। पूजो सन् 1950 से 60 तक मार्टिन गुडमैन्स मैगज़ीन मैनेजमेंट कंपनी नामक एक प्रकाशन संस्था में बतौर लेखक/संपादक काम करता रहा। गॉड फ़ादर के प्रकाशन से पूर्व, पूजो द्वारा रचित "द डार्क एरीना" (1955), "द फोर्चुनेट पिलग्रिम" (1965), "द रन अवे समर ऑफ़ डेवी शॉ" (1966) और "सिक्स ग्रेव्ज़ टु म्यूनिख" (1967 में मेरियो क्लेरी के नाम से) उपन्यास प्रकाशित हुए।

गॉड फ़ादर सन् 1969 में प्रकाशित हुई, इसके बाद फूल्स डाई (1978), द सिसिलियन (1984), द फोर्थ के (1991), द लास्ट डॉन (1996) ओमेरिया (2000) उपन्यास प्रकाशित हुए। उसका अंतिम उपन्यास द फेमिली (2001) अधूरा रह गया, जिसे उसकी प्रेमिका कैरोल जीनो ने पूरा किया। उपन्यासों के अतिरिक्त उन्होंने दस कहानी संग्रह और कुछ निबंध भी लिखे। प्रारम्भ में वह मेरियो क्लेरी के नाम से लिखता रहा। कथाकार के साथ-साथ वे एक कुशल पटकथा लेखक भी थे। गॉड फ़ादर फ़िल्म की पटकथा उसने स्वयं लिखी थी। मेरियो पूजो का लेखकीय जीवन का प्रारम्भिक दौर बहुत ही कठिन और संघर्षपूर्ण था। उसके शुरू के उपन्यासों से उसे समुचित पैसा नहीं मिल पाता था, जिससे वे बीस हज़ार डॉलर के भारी कर्ज़ में डूब गए। मेरियो पूजो के लिए वह दौर अवसाद और निराशा का था। चूँकि लेखन ही उनकी आजीविका का एक मात्र साधन था, वह इस वास्तविकता से वाकिफ़ था कि जब तक वे कोई बड़ी रचना नहीं लिखेंगे, उनका जीवन सामान्य नहीं होगा। उनके एक पूर्व-लिखित उपन्यास (द फ़ोर्चुनेट पिलग्रिम) में एक गैंगस्टर का पात्र था, जिसकी ओर उनके मित्रों ने लेखक का ध्यान दिलाया। उन लोगों ने पूजो को उस चरित्र को सशक्त रूप में अमेरिका के अंडरवर्ल्ड के साथ जोड़कर नई कहानी रचने का सुझाव दिया। इसीके अनुसार पूजो इटली के माफ़िया की कहानियाँ और अमेरिकी अंडरवर्ल्ड की ख़बरों को एकत्रित कर "माफ़िया" नामक उपन्यास की रचना में डूब गया। यही रचना "गॉड फ़ादर" के रूप में विकसित हुई। 1968 में जब पूजो यूरोप में भ्रमण कर रहा था, तब इस उपन्यास के सौ पन्नों को अपने लिटररी एजेंट को उसने पढ़ने के लिए दिया। इस यात्रा से लौटते ही उसे इस उपन्यास के लिए एक प्रकाशन संस्था से चार लाख दस हज़ार डॉलर की रकम पेशगी के रूप में प्राप्त हुई। उस प्रकाशन संस्था ने केवल सौ पन्नो को पढ़कर ही उपन्यास की कथावस्तु को पहचान लिया। यह भी एक कीर्तिमान है कि इससे पहले किसी लेखक को इतनी बड़ी राशि उपन्यास के प्रकाशन से पहले कभी नहीं प्राप्त हुई। जब गॉड फ़ादर उपन्यास अपने पूर्ण स्वरूप में पाठकों के हाथ आया तो इसका भव्य स्वागत हुआ। वह कई महीनों तक लगातार न्यूयॉर्क टाइम्स की सर्वश्रेष्ठ पठनीय पुस्तकों की सूची में प्रथम स्थान पर जमी रही। मेरियो पूजो की कलात्मकता उसके क़िस्सागोई शैली में दिखाई देती है। अंडरवर्ल्ड की हिंसात्मक गतिविधियों का यथार्थवादी रोमांचक वर्णन ही ऐसे उपन्यास विधा की विशेषता है। पूजो ने इसी विशिष्टता को हासिल कर लिया था। गॉड फ़ादर उपन्यास में अमेरिकी अंडरवर्ल्ड के सरगना विटो कोर्लियोन और उसके परिवार की अपराध कथा का विस्तार से वर्णित है।

विटो-एन्डोलिनी का जन्म सिसली के कोर्लियोन नगर में हुआ था। सिसली, इटली से पलायन कर अमेरिका में प्रवेश करते समय वह अपनी वास्तविक पारिवारिक पहचान नहीं बताता इसलिए उसे कोर्लियोन नगर का मानकर दस्तावेज़ों में विटो के साथ कोर्लियोन दर्ज कर दिया जाता है, इससे वह अमेरिका में विटो कोर्लियोन के नाम से जाना जाता है। विटो का परिवार तीन पुत्रों और एक पुत्री सहित न्यूयॉर्क शहर में आ बसा था। उसके पुत्रों के नाम क्रमश: सेन्टीनो (सनी), फ्रेडिरिको (फ्रेडो) और माइकेल (माइक) कोर्लियोन थे तथा पुत्री का नाम कॉन्स्टांजा (कॉनी) कोर्लियोन था। इनके साथ विटो ने टॉम हेगन नामक एक युवा विधि विशेषज्ञ को अपने परिवार में शामिल कर लिया था, जो हर पल विटो के साथ उसके सभी कारोबारी गतिविधियों में मौजूद रहता था। विटो कोर्लियोन ने अपराध जगत में गॉड फ़ादर का दर्जा हासिल कर लिया था। उसके कारोबार में भ्रष्ट माध्यमों से ग़ैरक़ानूनी व्यापार कराना, किराए के हत्यारों को मुहैया कराना, धनाढ्य लोगों के विवादों को अपने राजनीतिक प्रभाव से निपटाना आदि शामिल था। उसकी अवज्ञा कोई नहीं कर सकता था। इस तरह वह माफ़िया का एक विशिष्ट नायक बन गया था, उसका साम्राज्य अंडरवर्ल्ड में विस्तारित हो चुका था। उपन्यास में "गॉड फ़ादर" का सम्बोधन केवल विटो कोर्लियोन के लिए ही होता है। उपन्यास में आगे चलकर माइकेल (माइक), विटो कोर्लियोन का स्थान ले लेता है। माइकेल कोमल स्वभाव का हँसमुख व्यक्ति था जो हत्या और ख़ून-ख़राबा पसंद नहीं करता था। वह अपने परिवार और पिता की ख्याति से अवगत था। वह अपने पिता विटो कोर्लियोन से बेहद प्यार करता था। माइक अपनी प्रेमिका केय-एडम्स से विवाह कर, अपराध-जगत से दूर शांत अमेरिकी जीवन बिताना चाहता था। कोर्लियोन परिवार एक आपराधिक संगठन बन गया था जो जुएखाने और अन्य ग़ैरक़ानूनी कारोबार के द्वारा करोड़ों डॉलर की कमाई करता था। विटो के पीछे उसकी विरासत का हक़दार उसका बड़ा बेटा सेन्टीनो था। विटो के इस संगठन में और भी कुछ महत्वपूर्ण लोग थे जो कोर्लियोन परिवार के ग़ैरक़ानूनी कारोबार की देख-रेख के लिए नियुक्त थे। विटो कोर्लियोन साठ वर्ष की उम्र में अमेरिकी अंडरवर्ल्ड का "डॉन" कहलाता था। बाहर से विटो निहायती सीधा-सादा किसान की तरह दिखाई देता था। किन्तु भीतर से वह अस्त-व्यस्त, मोटा-ताज़ा बुलडॉग का चेहरे वाला, घरघराती आवाज़ लिए हुए एक बुद्धिमान और सतर्क व्यक्ति था। वह कभी टेलीफोन पर बात नहीं करता था। उसके चारों और अत्याधुनिक हथियारों से लैस अंगरक्षकों का दस्ता मौजूद रहता था, जिसमें ज़्यादातर लोग उसी के परिवार के लोग हुआ करते थे। उसके पिता की इटली के कोर्लियोन गाँव में नृशंस हत्या कर दी गई थी। इस हत्या का बदला उसका पुत्र विटो कोर्लियोन कभी भी ले सकता था, इसलिए विटो को ख़त्म कर देने के लिए पिता के हत्यारे घात लगाए बैठे थे। इसी कारण विटो कोर्लियोन हमेशा के लिए इटली छोड़कर अमेरिका भाग आया था।

गॉड फ़ादर, उपन्यास और फ़िल्म दोनों का प्रारम्भ एक जैसा ही होता है। विटो की लाड़ली बेटी कॉनी के विवाह के अवसर पर कोर्लियोन परिवार "लाँग बीच" पर एक भव्य विवाहोत्सव का आयोजन करता है। उस समारोह में विटो का आतिथ्य पाने के लिए उसके अपराध जगत के उसके क़रीबी मित्र एकत्रित होते हैं। विटो की पुत्री के लिए लोग डॉलर से भरे लिफाफे, महँगे उपहार और फूलों से भरे टोकरे लिए लोग पहुँचते हैं। विटो इस अवसर पर भी अपने कारोबार में उलझा रहता है। इस शुभ अवसर पर वह सबकी माँग पूरी करेगा, इस विश्वास से उसके आश्रितों और चहेतों की भीड़ बढ़ जाती है। इस अवसर पर माइकेल अपनी प्रेमिका केय एडम्स को अपने परिवार से परिचय कराता है। दूसरी ओर जॉनी फॉन्टेन नामक एक मशहूर गायक कलाकार, विटो के पास एक ख़ास माँग लेकर सिफ़ारिश के लिए आता है। वह हॉलीवुड के ख्यातनामा फ़िल्मकार जैक वॉल्ट्ज की फ़िल्म में काम प्राप्त करना चाहता था, किन्तु जैक उसे अपनी फ़िल्म में नहीं में लेना चाहता था। जब जॉनी विटो से मदद माँगता है तो विटो इस काम के लिए फ़ौरन टॉम हेगेन को जैक वॉल्ट्ज़ से बात करने के लिए लॉस एंजेल्स रवाना करता देता है। जैक वॉल्ट्ज़, टॉम हेगेन के प्रस्ताव को अस्वीकार कर देता है यह जानकार भी कि टॉम हेगेन, विटो कोर्लियोन का दूत है। जैक वॉल्ट्ज़ के पास खार्टूम नाम का उकृष्ट नस्ल का एक महँगा घोड़ा था, उसकी क़ीमत कुछ मिलियन डॉलर थी। जैक वॉल्ट्ज़ टॉम हेगेन को वह घोड़ा बड़े गर्व से दिखाता है। एक रात जैक वॉल्ट्ज़ अपने बिस्तरे पर नींद से घबराकर जागता है जैसे उसने कोई भयानक सपना देखा हो। अचानक उसका हाथ गीले खून से भीग जाता है। उसके बिछौने पर उसे उसके प्रिय घोड़े खार्टूम की कटी हुई रखी हुई मिलती है। वह डरकर पागलों की तरह चिल्लाता है। उसे आभास हो जाता है कि इस कुकृत्य के लिए कौन ज़िम्मेदार था? वह फ़ौरन टॉम हेगेन को फोन पर जॉनी फॉन्टेन को अपनी फ़िल्म में भूमिका दिये जाने की खबर दे देता है।

1945 के क्रिसमस के पहले नशीले पदार्थों के कारोबार का सरताज वर्जिल सोलोज़ो (द टर्क), ताताग्लिया परिवार के साथ जुड़कर साझे में विटो को भी उसके नशीले पदार्थों के व्यापार में पूँजी निवेश की माँग लेकर आता है। विटो कोर्लियोन अपराध जगत का डॉन होने के बावजूद नशीले पदार्थों के कारोबार के ख़िलाफ़ था। इसलिए वह किसी से इस व्यापार के लिए समझौता नहीं कर सकता था। उसकी नज़रों में यह कारोबार ख़तरनाक था जिससे उसकी छवि बिगड़ सकती थी। वर्जिल सोलोज़ो, विटो से उसके प्रभावशाली संबंधों का उपयोग नशीले पदार्थों (नार्कोटिक्स) के कारोबार के लिए करने की माँग पर अड़ जाता है। विटो कोर्लियोन, सोलोज़ो की माँग को ठुकरा देता है। एक शाम बाज़ार में फल ख़रीदते समय सारे आम सड़क पर सोलोज़ो का गिरोह विटो कोर्लियोन पर गोलियाँ बरसाकर क़ातिलाना हमला करता देता है। विटो सड़क पर ही लुढ़क जाता है। विटो के साथी टॉम हेगेन को हमलावर अगुआ कर लेते हैं। सुयोग से विटो गोलियों से बुरी तरह घायल हो जाता है किन्तु उसकी जान किसी तरह बच जाती है। उसे इलाज के लिए एक गोपनीय जगह पर अस्पताल में रखा जाता है। विटो के परिवार में इस घटना से खलबली मच जाती है। सेन्टीनो परिस्थितियों को अपने क़ाबू में करने की कोशिश करता है। माइकेल अपने पिता की हालत देखने के लिए अस्पताल पहुँचता है। वहाँ की व्यवस्था देखकर उसे दुबारा पिता पर हमले की आशंका होती है। वह बेहोश पिता को होशियारी से अस्पताल के दूसरे हिस्से में चुपचाप लेकर चला जाता है। उसके अनुमान के अनुसार ही उसकी मुठभेड़ न्यूयॉर्क पुलिस अफसर कैप्टेन मार्क मैक्लुस्की से होती है जो विटो को मारने के लिए भेजा गया था। इस मुठभेड़ में माइक ज़ख्मी हो जाता है।

सोलोज़ो का गिरोह टॉम हेगेन को इस शर्त पर रिहा करता है कि वह सेन्टीनो को नशीले पदार्थों के कारोबार में शामिल करवाएगा। इधर विटो अस्पताल से घर वापस लौटता है। माइकेल अपने पिता के हमलावरों से बदला लेने की ठान लेता है। वह टॉम हेगेन की मध्यस्थता में सोलोज़ो से बातचीत के लिए तैयार हो जाता है। वह बातचीत के दौरान ही सोलोज़ो और मार्क मैक्लुस्की को वार्ता स्थल में पहले से छिपाकर रखे हुए रिवॉल्वर से मार डालता है। इस हत्याकांड से सोलोज और विटो कोर्लियोन परिवारों के बीच युद्ध छिड़ जाता है।

पुलिस सभी अपराधी परिवारों को घेर लेती है किन्तु इनके बीच हत्या का सिलसिला नहीं थमता। विटो कोर्लियोन के बेटों पर ख़तरा मंडराने लगता है। माइकेल अपने एक विश्वासपात्र अंगरक्षक को साथ लेकर सिसली (द्वीप) में पनाह लेता है। उसके भाई फ्रेडो को लॉस-वेगास में मो-ग्रीन नामक विटो का एक कारोबारी मित्र शरण देता है।

विटो कोर्लियोन की लाड़ली पुत्री कोनी का दांपत्य जीवन उसके ऐयाश पति कार्लो के दुर्व्यवहार और अत्याचार से बुरी तरह प्रभावित हो जाता है। सेन्टीनो को जब अपनी प्यारी बहन पर कार्लो के अत्याचार की ख़बर मिलती है तो आगबबूला होकर वह अपने कार्लो को सड़क पर घसीटकर पीट-पीटकर बेहाल कर देता है और उसे मार डालने की धमकी देकर छोड़ देता है। लेकिन कुछ ही दिनों बाद उसे फिर से बहन पर कार्लो के हमले की ख़बर मिलती है। उस दिन सेंटीनो ग़ुस्से के आवेग में कार्लो से बदला लेने के लिए अपनी कार में रवाना होता है। उसकी हत्या के लिए अवसर की तलाश में घूमते गिरोह को हाई वे के एक चेक पोस्ट पर सेंटीनो की कार खड़ी मिलती है। हत्यारे उसके कार को मशीन-गन की गोलियों से छलनी कर देते हैं जिसमें सेंटीनो दम तोड़ देता है। सुदूर सिसली में भूमिगत जीवन बिता रहे माइकेल की मित्रता को एपोलोनिया विटेली नामक एक सुंदर युवती और उसके परिवार से हो जाती है। वह एलोपोनिया से प्रेम करने लगता है और वहीं माइकेल एलोपोनिया से विवाह कर लेता है। उसके हत्यारे उसकी टोह लेते हुए सिसली में प्रवेश करते हैं। माइकेल को हताहत करने के लिए उसकी कार में बम रखा जाता है। लेकिन उस कार में एलोपोनिया सवार होती है और मारी जाती है। माइकेल की छोटी से शांत दुनिया ध्वस्त हो जाती है। यह उसके लिए चेतावनी थी कि उसके हत्यारे सिसली में भी मौजूद थे।

अपने प्यारे ज्येष्ठ पुत्र सेंटोनी की हत्या के सदमे से विटो कोर्लियोन बुरी तरह पराजित हो जाता है और वह सभी आपराधिक गुटों के बीच पनप रही हिंसा को समाप्त कर देना चाहता है। उन दिनों सोलोज़ो के गिरोह की कमान डॉन एमिलियो बार्ज़ीनी के हाथों में थी। विटो कोर्लियोन अपने सभी प्रतिद्वंद्वी परिवारों को उनके नशीले पदार्थों के कारोबार में दख़ल न देने और सेंटीनो की हत्या का बदला नहीं लेने का ऐलान कर देता है। बदले में विटो अपने बेटे माइकेल की सुरक्षा चाहता है। इस समझौते के बाद माइकेल सिसली से न्यूयॉर्क अपने परिवार में लौट आता है। वह अपनी पूर्व प्रेमिका केय-एडम्स से विवाह कर लेता है और इस तरह वह अपने जीवन को सुस्थिर करना चाहता है। अपने पिता विटो के गिरते स्वास्थ्य और छोटे भाई को कारोबार के लिए अयोग्य देखकर माइकेल, परिवार का कारोबार अपने हाथों में ले लेता है। वह पत्नी केय-एडम्स को विश्वास दिलाता है कि भविष्य के कुछ वर्षों में उसका सारा ग़ैरक़ानूनी कारोबार ख़त्म हो जाएगा और वह नए सिरे से वैध कारोबार ही करेगा। अपने कारोबार को इस दिशा में संगठित करने के लिए अपने व्यापार के लिए लॉस वेगास की चुनता है और टॉम हेगेन से सारा कारोबार लास वेगास स्थानांतरित करने का आदेश देता है। माइकेल लास वेगास में स्थित केसिनो (जुआघर) के समूचे शेयर पिता के बिजनेस पार्टनर मो-ग्रीन्स से खरीदकर कर उस केसीनो को पूरी तरह अपने अधीन कर लेना चाहता था। मो-ग्रीन उस केसीनो का आधा मालिक था। वह किसी भी सूरत में अपना हिस्सा माइकेल को नहीं बेचना चाहता था। इस डील पर माइकेल और मो-ग्रीन में विवाद और टकराहट की स्थिति पैदा हो जाती है। ग्रीन, विटो को कारोबार से भगोड़ा कहकर माइकेल और विटो का अपमान करता है। ग्रीन विटो परिवार को न्यूयॉर्क से कारोबार को समेटने के पीछे विटो की गिरती साख और उसके ख़त्म होती ताक़त की हँसी उड़ाता है। इस मामले में माइकेल का मझला भाई फ्रेडो, मो-ग्रीन के हाथों बिक जाता है।

कारोबार के बिगड़ते हालातों के बीच विटो कोर्लियोन को अकस्मात दिल का घातक दौरा पड़ता है और उसकी मृत्यु हो जाती है। विटो की मृत्यु से अपराध जगत के सारे समीकरण एकाएक बदल जाते हैं। विटो के सारे दोस्त माइकेल के दुश्मन हो जाते हैं। उनमें से एक डॉन बार्जीनी भी था। विटो के ख़िलाफ़ बार्जीनी ने भी युद्ध छेड़ दिया था। विटो का एक समय का मुख़बिर टेसियो, माइकेल को डॉन बार्ज़ीनी से सुलह कराने के बहाने से बैठक आयोजित करता है। माइकेल टेसियो की चाल भाँपकर बार्ज़ीनी का ही ख़ात्मा कर देता है। माइकेल विटो के बाद अपने साम्राज्य को स्थापित करने के लिए अपने और अपने पिता के सभी शत्रुओं का ख़ात्मा कर देने के लिए कमर कस लेता है। सबसे पहले वह अपने गद्दार बहनोई कार्लो से उसके विश्वासघात को क़बूल करवाकर उसे बेरहम तरीक़े से मरवा डालता है।

माइकेल अपने बहन के नवजात शिशु के लिए गॉड फ़ादर बनकर उसका पालन-पोषण करना चाहता है। एक तरफ़ माइकेल उस शिशु का बाप्तिस्मा चर्च में वह करवा रहा होता है और दूसरी ओर, ठीक उसी समय उसके हत्यारे उसके परिवार के शत्रुओं को चुन-चुनकर गोलियों से भून डालते हैं। माइकेल की बहन कोनी, केय-एडम्स को माइकेल का असली रूप बताना चाहती है, वह माइकेल को हत्यारा घोषित कर देती है। किन्तु माइकेल केय की दृष्टि में एक ईमानदार पति ही बना रहता है। माइकेल जिसने कभी नहीं इस अपराध जगत का डॉन बनाने की कल्पना भी नहीं की थी, उसने अपने शत्रुओं को हताहत कर एक नए साम्राज्य को स्थापित कर चुका था। केय एडम्स देखती है कि एक बड़ा समूह उसके पति को "डॉन कोर्लियोन" कहकर संबोधित करते हैं।

मूल उपन्यास इस बिन्दु पर समाप्त हो जाता है और फ़िल्म का अंत भी यही है। अंतत: माइकेल अपने पिता डॉन विटो कोर्लियोन की विरासत को पूरी तरह हासिल कर लेता है। इसके सिवाय उसके लिए दूसरा कोई विकल्प नहीं था। यदि वह ऐसा नहीं करता तो उसे मार डाला जाता और उसके साथ विटो कोर्लियोन का सारा परिवार ख़त्म हो जाता।

गॉड फ़ादर उपन्यास को सन् 1972 में हॉलीवुड में फ़िल्म के लिए चुना गया। इटली के महान निर्देशक फ्रांसिस फोर्ड कोपोला के निर्देशन में इस फ़िल्म का निर्माण एलबर्ट एस रूडी ने किया। इसकी सशक्त पटकथा मेरियो पूजो के साथ कोपोला ने लिखी। इस फ़िल्म में हॉलीवुड के महान कलाकारों ने अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ अभिनय प्रस्तुत किया। हॉलीवुड के लिजेंड मार्लन ब्रांडो ने विटो कोर्लियोन के पात्र को अमरत्व प्रदान किया, उनके साथ माइकेल की भूमिका को एल पेचीनो ने जीवंत कर दिया। टॉम हेगेन के रूप में रॉबर्ट ड्यूवाल, विटो के बड़े बेटे सेन्टीनो (सोनी) की भूमिका में जेम्स कान, माइकेल की पत्नी केय एडम्स की भूमिका में उस समय की मशहूर नायिका डायान कीटन, के साथ अंडरवर्ल्ड के अन्य पात्रों में उस ज़माने के हॉलीवुड के सुविख्यात कलाकारों ने इसे फ़िल्मी इतिहास में शीर्ष पर स्थापित कर दिया। फ़िल्म के रूप में यह एक वास्तविक और यथार्थवादी अपराध फ़िल्म है जिसमें परस्पर प्रतिद्वंद्वी गुटों में होने वाले ख़ूनी मुठभेड़, पारिवारिक कलह से उत्पन्न कारोबारी झगड़े, पेशेवर अपराधियों में डॉन बनने की अभिलाषा जिससे कि वे कुख्यात अपराधी गिरोहों के सरगना के रूप में आतंक फैला सकें। इस फ़िल्म ने मेरियों पूजो के उपन्यास को उसके मूल रूप में जीवंत कर दिया है। फ़िल्म में उपन्यास की मूल कथा को यथावत चित्रित किया गया है जो कि इस फ़िल्म की सबसे बड़ी विशेषता है। इसने फ़िल्मों में एक नई उपविधा को जन्म दिया जिसने वास्तविक अंडरवर्ल्ड को भी प्रभावित किया। फ़िल्म में सन् 1945–1955 के न्यूयॉर्क शहर को बख़ूबी दर्शाया गया है। यह एक पीरियड फ़िल्म भी बन गई। जिसमें उस काल की वेषभूषा, अभिजात वर्ग की संस्कृति, आपराधिक जगत के तौर तरीक़े, उनकी भाषा और आचरण और परिवेश को यथार्थपरक ढंग से रूपयित किया गया है। इस फ़िल्म की सिनेमाटोग्राफी विशेष रूप से ग़ौर करने वाली है क्योंकि फ़िल्म में हिंसा की अधिकांश घटनाएँ रात के अँधेरे या धुँधलके में घटित होती हैं। फ़िल्मीकरण की इस उपविधा (सबजॉनर) को सिनेमाई भाषा में फ़िल्म "नोआर" कहा जाता है। यह अपराध कथाओं को बयान करने की एक विशिष्ट शैली है। आमतौर पर इन फ़िल्मों का फ़ोकस कुछ ख़ास आपराधिक पात्रों पर होता है जिनके इर्दगिर्द माफ़िया का जाल बिछा होता है। ये फ़िल्में एक भिन्न कलाजगत को प्रस्तुत करती हैं। गॉड फ़ादर इसी उपविधा की एक सशक्त फ़िल्म है। इस परंपरा में कई लोकप्रिय और कलात्मक फ़िल्मों का निर्माण हॉलीवुड में हुआ है जिनमें प्रमुख हैं, "गुड फेलास, द गॉड फ़ादर, वन्स अपान ए टाइम इन अमेरिका, पल्प फिक्शन" आदि। इन फ़िल्मों में कहानी के फ़िल्मांकन में एक स्याह रंग दिखाई देता है जो वीभत्सता और हिंसा को उसके वास्तविक रूप में दर्शाता है। फ़िल्म में बाहरी और भीतरी दृश्यों एवं घटनाओं के चित्रण में एक ख़ौफ़ और आतंक का वातावरण छाया रहता है जो ऐसे अपराधप्रधान फ़िल्मों की सहज प्रकृति होती है।

इस फ़िल्म को ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कलात्मक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण फ़िल्म के रूप में अमेरिकी लाइब्रेरी कांग्रेस ने 1990 में अपने अभिलेखागार में शामिल किया। इस फ़िल्म का दूसरा भाग गॉड फ़ादर – II सन् 1974 में और गॉड फ़ादर-III 1990 में रिलीज़ हुआ। गॉड फ़ादर फ़िल्म का द्वितीय और तृतीय भाग, गॉड फ़ादर की परंपरा के पूरक माने जाते हैं। लगभग तीन घंटों की अवधि की गॉड फ़ादर फ़िल्म आदि से अंत तक दर्शकों को रोमांचित करती है और गंभीर रूप से प्रभावित करती है। क्योंकि पहली बार फ़िल्म के माध्यम से अंडरवर्ल्ड की वास्तविकता लोगों के सामने आई। इस फ़िल्म और उपन्यास ने अपराध जगत की भाषा और प्रयुक्तियों को लोकप्रिय बनाया। भारतीय फ़िल्मों में भी गॉड फ़ादर का प्रत्यक्ष प्रभाव देखा जा सकता है। यह एक लोकप्रिय उपविधा के रूप में स्थापित हो चुकी है। हिंदी में सन् 1975 में फिरोज खान के निर्देशन और निर्माण में "धर्मात्मा" फ़िल्म बनी। इस फ़िल्म में विटो कॉलियन के रूप में प्रेमनाथ (धर्मात्मा – गॉड फ़ादर), माइकेल की भूमिका में फिरोज खान स्वयं, उसकी लाड़ली बहन की भूमिका में फ़रीदा जलाल और पहली प्रेमिका के पात्र को हेमामालिनी ने तथा पत्नी केय एडम्स के लिए रेखा ने अपने अभिन्य कौशल से इस फ़िल्म को यादगार बना दिया। इसी क्रम में माफ़िया फ़िल्मों के मशहूर निर्माता-निर्देशक रामगोपाल वर्मा ने सन् 1998 में सत्या, 2002 में कंपनी, 2005 में डी और 2013 में सत्या-2 का निर्माण किया। रामगोपाल वर्मा के द्वारा ही निर्मित सरकार (2005) और सरकार राज (2008) फ़िल्में भी इसी उपविधा की महत्वपूर्ण फ़िल्में हैं। फ़िल्म माध्यम साहित्यिक पाठ का दृश्य रूपान्तरण होता है। औपन्यासिक पाठ जब फ़िल्म के परदे पर उतारा जाता है वह दर्शकों के लिए दृश्य रूपक बन जाता है। औपन्यासिक वर्णन दृश्यों के रूप में परिवेश और पात्रों को जीवंत कर देते हैं। गॉड फ़ादर उपन्यास का फ़िल्मी रूपान्तरण दर्शकों को एक रोमांचक अनुभूति प्रदान करता है। उपन्यास में निहित घटनाओं का यथार्थपरक प्रदर्शन जब आँखों के सामने होतातो दर्शक स्वयं कथानक में शामिल हो जाता है। मेरियो पूजो के द्वारा निर्मित विटो, कोपोला के द्वारा सेल्युलाइड पर हाड़-मांस के विटो कोर्लियोन के रूप में जीवित हो जाता है। फ़िल्म के परदे पर विटो का व्यक्तित्व दर्शक को अलग ढंग से प्रभावित करता है। फ़िल्म में विटो एक गैंगस्टर तो है किन्तु वह केवल रक्त चूसने वाला आतंकी नहीं है बल्कि मन और मस्तिष्क रखने वाला एक इंसान है। उसके पास हिंसा करने के लिए भयंकर हथियार भी हैं जिनका प्रयोग वह सोच समझकर अपने प्रतिद्वंद्वी पर करते समय क्रूर और भयानक हो जाता है। वह स्वयं नहीं मारता किन्तु उसका हिंसा का तंत्र बहुत व्यापक और विस्तृत है जो उसके इशारे पर कहीं भी किसी को मार सकता है। फ़िल्म में उसका यह रूप उसे हीरो (नायक) बना देता है। सताए हुए लोगों के लिए उसका हृदय उदार है, परंतु उसका मस्तिष्क बहुत ही तेज़ है, वह आने वाले ख़तरों को पहले ही भाँप लेता है, वह अपने निर्णयों में किसी का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करता, अपने बेटों का भी। उसे अपनी संतान से बेहद प्यार है। गॉड फ़ादर फ़िल्म के संवाद सीधे उपन्यास से लिए गए हैं। फ़िल्म में सभी गैंगस्टर हिंसा को "बिजनेस" कहते हैं। वे सब एक दूसरे का ख़ून पीते हैं परंतु अपनी जघन्य हिंसा को व्यावसायिकता का जामा पहनाते हैं। हॉलीवुड में मार्लन ब्रांडो अभिनय सम्राट कहलाते थे, विटो-कोर्लियोन के रूप में वे अत्यंत सहज और स्वाभाविक लगते हैं। दर्शकों ने भी मार्लन ब्रांडो को फ़िल्म से प्रभावित होकर डॉन के रूप में स्वीकार कर लिया।

गॉड फ़ादर फ़िल्म ने अपराध फ़िल्मों के इतिहास को नए सिरे से गढ़ा। यह फ़िल्म मनोरंजन प्रधान न होते हुए भी सिनेमा की एक ऐसी विधा है जो समाज में पनप रहे एक भिन्न साम्राज्यवादी ताक़तों को उद्घाटित करता है। यह भी एक वास्तविकता है, एक सामाजिक यथार्थ है जिसके साथ सभ्य समाज जीने के लिए मजबूर है।

आज भी गॉड फ़ादर उपन्यास और फ़िल्म दोनों ही लोकप्रियता के शिखर पर विराजमान हैं।

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