वीर बाल दिवस 

01-02-2026

वीर बाल दिवस 

वंशिका संधू  (अंक: 293, फरवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

वीर बाल दिवस वीर बाल दिवस हर वर्ष दिसंबर महीने की 26 तारीख़ को मनाया जाता है। इस दिन मुग़लों के ख़िलाफ़ लड़ते हुए शहीद हुए गुरु गोविंद सिंह जी के बेटों की वीरता और साहस को याद किया जाता है। यह वीर बाल दिवस गुरु गोविंद सिंह जी के दो छोटे बेटों साहबज़ादा जोरावर सिंह और साहिबज़ादा फतेह सिंह की महान शौर्य गाथा को समर्पित है। इन दोनों ने केवल 9 वर्ष और 7 वर्ष की उम्र में ऐसा साहस और वीरता दिखाई जिसकी मिसाल पूरे इतिहास में बहुत कम दिखाई पड़ती है। 

साल 1704 में आनंदपुर साहिब की लड़ाई के दौरान गुरु गोविंद सिंह जी का पूरा परिवार बिछड़ गया था। माता गुजरी जी और दोनों छोटे साहिबज़ादों को सरहिंद के नवाब वज़ीर खान ने पकड़ लिया और उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए लालच भी दिया और डराया धमकाया भी, परन्तु दोनों वीरों ने एक ही जवाब दिया “हम अपना धर्म नहीं छोड़ेंगे” उनकी आँखों में साहस साफ़ दिखाई दे रहा था यह जवाब सुनकर सरहिंद के नवाब वज़ीर खान को क्रोध आ गया और उसने उन दोनों वीरों को दीवार में चुनवा दिया। यह सज़ा बहुत ही बुरी थी। परन्तु दोनों साहिबज़ादे बिल्कुल भी नहीं डरे और केवल अपने भगवान को याद कर उनका जयकारा लगाने लगे “वाहेगुरु जी का खालसा वाहेगुरु जी की फतेह” वह अपने धर्म और सत्य के लिए हँसते-हँसते बलिदान हो गए। 

उसी वक़्त गुजरी माता ने गढ़ी में अपने प्राण त्याग दिए। उस एक ही दिन में तीन-तीन महान आत्माओं के बलिदान ने पूरे सिख इतिहास को गर्व से भर दिया। 

वीर बाल दिवस हमें यह सिखाता है कि साहस उम्र पर निर्भर नहीं करता और सत्य की राह मुश्किल हो सकती है, परन्तु उसे अपनाने वाले सदा अमर होते हैं। गुरु गोविंद जी का परिवार पूरे भारतवर्ष के लिए एक महान मिसाल है। उनका परिवार हमें त्याग, धर्मनिष्ठा, निडरता, और कर्त्तव्य पालन की प्रेरणा देता है। इसलिए कहा गया है कि वीर बाल दिवस एक दिन नहीं है, बल्कि एक ऐसी सीख है जिसे हर पीढ़ी को अपनाना चाहिए। 

वंशिका संधू 
10 कक्षा की छात्रा
राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गाहलियां
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश

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