सूत्र पुराण: स्वर्ग, नरक और ब्रेकिंग न्यूज़
डॉ. अनुराग शर्मा ‘सम्यक’
सूत्र कोई व्यक्ति नहीं होता।
सूत्र एक व्यवस्था है।
सूत्र एक भावना है।
सूत्र वह प्राणी है जो न दिखता है, न पकड़ा जाता है,
पर हर रात 9 बजे देश की नींद हराम कर देता है।
सूत्र का कोई नाम नहीं होता,
पर हर चैनल कहता है—
“हमारे पास पुख़्ता सूत्र हैं।”
सूत्र का सबसे बड़ा गुण है—
उत्तरदायित्व से एलर्जी।
अगर ख़बर सही निकली—
“हमने पहले ही बताया था।”
अगर ग़लत निकली—
“हम तो सिर्फ़ सूत्र बता रहे थे।”
सूत्र वही है जिसने लोकतंत्र में
‘कन्फ़र्म’ शब्द को बेरोज़गार कर दिया
और सम्भावना को सरताज बना दिया।
उस रात भी सब सामान्य था।
सूत्र अपने बिस्तर पर लेटा था,
एक हाथ में मोबाइल,
दूसरे में आत्मविश्वास।
टीवी पर बहस चल रही थी—
“क्या देश ख़तरे में है?”
सूत्र ने सोचा—
“ख़तरा तो रोज़ रहता है,
“आज कुछ बड़ा देना पड़ेगा। ‘टीआरपी’ भूखी है।”
उसने ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ खोली, आधा मैसेज पढ़ा, आधा ख़ुद गढ़ा और भेज दिया—
सूत्रों के अनुसार
शीर्ष स्तर पर बड़ा मंथन,
देर रात तक हलचल।”
बस।
देश काँप गया।
एंकर उछल पड़ा।
पैनलिस्ट चिल्लाने लगे।
अचानक कमरे की लाइट फड़फड़ाई।
धुएँ के बीच दो भयानक आकृतियाँ प्रकट हुईं—
लाल आँखें, मूँछें तनी हुई, हाथ में रस्सी, और आँखों में सरकारी फ़ाइलों जैसी बेरुख़ी।
यकायक आवाज़ आई “सूत्र!”
सूत्र घबरा गया।
“क . . . कौन हो आप?”
“यमदूत, ” दोनों ने एक साथ कहा।
“चलो।”
सूत्र को पूरा यक़ीन था कि वह अच्छा आदमी है।
उसने कभी किसी का नाम नहीं लिया,
कभी सीधे झूठ नहीं बोला,
और हर वाक्य के आगे ढाल लगा दी—
“सूत्रों के अनुसार . . . ”
उसी ढाल के भरोसे वह वर्षों से न्यूज़ चैनलों को ख़बरें खिला रहा था।
कभी आधी, कभी अधूरी, कभी पूरी तरह कच्ची—
पर ‘टीआरपी’ हमेशा पकी हुई।
सूत्र हड़बड़ा गया।
“कहाँ?”
“नरक।”
सूत्र ठहाका मारकर हँसा।
“अरे नहीं-नहीं, इसमें कोई ग़लतफ़हमी है।
मैं तो स्वर्ग वाली ‘कैटेगरी’ में आता हूँ।”
यमदूत चौंके।
“कैसे?”
सूत्र आत्मविश्वास से बोला—
“देखिए, मैंने कभी झूठ नहीं बोला।
मैं तो सिर्फ़ सूचना देता हूँ।
निर्णय जनता का होता है।
और फिर . . .
मैं देशहित में काम करता हूँ।”
पहला यमदूत फ़ाइल पलटने लगा।
फ़ाइल पर लिखा था—
‘स्वर्ग/नरक आवंटन विभाग (स्थापित: अनादि काल)’
दूसरा बोला—
“पर आदेश तो नरक का है।”
सूत्र ने तुरंत आपत्ति दर्ज कराई—
“ज़रूर कोई मिसइन्फॉर्मेशन होगी।
आजकल तो ग़लत ख़बरें बहुत चल रही हैं।”
यमदूत मुस्कराया।
वही मुस्कान, जो न्यूज़ एंकर ‘ब्रेकिंग’ से पहले देते हैं।
“हमें जो जानकारी मिली है . . . ”
वह रुका,
फिर बोला—
“वह सूत्र से ही मिली है।”
सूत्र सन्न।
पल भर में वह नरक में था।
न आग।
न कड़ाह।
न चीख़ें।
बस . . .
टीवी स्क्रीनें।
हज़ारों स्क्रीनें।
हर ‘स्क्रीन’ पर वही शब्द—
“सूत्रों के अनुसार . . . ”
“सूत्रों के मुताबिक़ . . . ”
“सूत्रों के हवाले से . . . ”
“सूत्रों की मानें तो . . . ”
सूत्र ने देखा—
एक किसान पिट गया क्योंकि ग़लत ख़बर चली।
एक डॉक्टर पर हमला हुआ क्योंकि अधूरी सूचना फैली।
एक दंगा भड़का क्योंकि “सूत्र” ने कहा था।
सूत्र चिल्लाया,
“ये मैंने नहीं किया! मैंने तो बस बताया था!”
तभी सामने एक विशाल कुर्सी पर
नरक के मुख्य न्यायाधीश प्रकट हुए।
चश्मा लगाए, हाथ में फ़ाइल।
फ़ाइल पर लिखा था:
केस नं. 404–तथ्य नहीं मिला
न्यायाधीश बोले,
“तुमने कभी झूठ नहीं बोला,
पर सच भी नहीं बोला।
तुमने ‘कन्फ़र्म’ से पहले ‘ब्रेकिंग’ चुनी।”
सूत्र बोला,
“लेकिन लोग तो मुझ पर भरोसा करते थे . . . ”
न्यायाधीश मुस्कराए,
“इसीलिए सज़ा भारी है।
यह नरक नहीं,
रिप्ले रूम है।
तुम अपनी हर ख़बर को उसके अंजाम के साथ देखोगे।”
यमदूतों ने उसे कुर्सी पर बाँध दिया।
एक-एक कर स्क्रीन चलने लगी—
एंकर चिल्ला रहा था,
“सूत्रों के मुताबिक़ स्थिति नियंत्रण में है।”
(और पीछे आग लगी हुई थी)
“सूत्रों के मुताबिक़ हालात सामान्य हैं।”
(पीछे अस्पताल भरा हुआ)
“सूत्रों के अनुसार कोई ख़तरा नहीं।”
(पीछे भगदड़)
सूत्र चिल्लाया—
“रोकिए!
मैंने ऐसा नहीं चाहा!”
न्यायाधीश बोले—
“नरक चाहने से नहीं,
परिणाम से बनता है।”
सूत्र काँपते हुए बोला—
“ये सब मैंने नहीं किया।
मैंने तो बस कहा था—
‘सम्भावना है’।”
यमदूत बोले—
“तुम्हें नरक इसलिए नहीं भेजा गया
कि तुमने झूठ बोला,
बल्कि इसलिए
कि तुमने सत्य की ज़िम्मेदारी कभी नहीं ली।”
सूत्र की चीख़ निकल गई।
अचानक—
‘अलार्म’ बजा।
सूत्र हड़बड़ाकर उठा।
पसीने से भीगा हुआ।
कमरा शांत था।
मोबाइल बग़ल में पड़ा था—
20 मिस्ड कॉल,
3 न्यूज़ चैनल,
और एक मैसेज:
“कुछ भी हो, बस ‘एक्सक्लूसिव’ चाहिए।”
सूत्र ने मोबाइल उठाया।
कुछ पल सोचा।
फिर पहली बार पूरा मैसेज पढ़ा।
दूसरी बार सोचा।
और धीरे से बुदबुदाया—
“आज ब्रेकिंग नहीं . . .
आज कन्फ़र्म करेंगे।”
बाहर न्यूज़ चैनलों में हलचल मच गई—
“सूत्र चुप है!”
और सूत्र,
पहली बार चैन से सो गया।