क़ुबूलनामा
अभिलाष गुप्ता
हालाँकि, कोई दावा-ए-पारसाई नहीं करता,
मेरा दुश्मन भी मेरी दिल से बुराई नहीं करता
जानता हूँ तमाम लोग, मुझे पसंद नहीं करते मगर,
मैं भी तो हर किसी से आशनाई नहीं करता . . .
सच है, अपनी पे आ जाऊँ तो किसी की नहीं सुनता
मगर, ख़राबतरीन हालात में भी बेअदबी, बेहयाई नहीं करता . . .
बहुत लोगों ने तोड़ा है आदतन यक़ीन मेरा,
फिर भी मैं जानकर किसी से बेवफ़ाई नहीं करता . . .
ख़ुशामदपसंद, इसलिए भी ख़फ़ा रहते हैं मुझसे,
मैं उनकी शान में क़सीदे नहीं पढ़ता, उनकी बड़ाई नहीं करता . . .
मेरे अज़ीज़, इसलिए भी फ़िदा रहते हैं मुझपर,
मैं उनकी ख़ामियाँ, उनके राज़, दिल में रखता हूँ, दुनियाभर में रुसवाई नहीं करता . . .